NHRCCB ने बाढ़ के बाद 60 परिवारों का थामा हाथ, बच्चों-बुजुर्गों के बीच पहुंचाई राहत
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| इंद्रावती बाढ़ से प्रभावित भाटागुड़ा और आमाखूनी के परिवारों को NHRCCB की टीम द्वारा चावल, सब्जियां, तेल, साबुन, शॉल और कपड़े वितरित किए गए। |
भारी बारिश और डीप डिप्रेशन से आई थी बाढ़
भारी बारिश और डीप डिप्रेशन के कारण इंद्रावती नदी उफान पर आई थी। बाढ़ की चपेट में आए परिवारों में भाटागुड़ा के 25 और आमाखूनी के 35 परिवार शामिल होने की जानकारी संस्था ने दी है। कुल 60 परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार व अपराध नियंत्रण ब्यूरो (एनएचआरसीसीबी) की बस्तर संभाग एवं जिला इकाई के सदस्य गांव पहुंचे।
बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ी सबसे ज्यादा परेशानी
बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ी। घरों में पानी घुसने से बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं, वहीं बुजुर्गों के लिए सुरक्षित स्थान पर रहना और जरूरी सामान जुटाना कठिन हो गया। पानी उतरने के बाद भी परिवारों को घरों की सफाई और जरूरी वस्तुओं की व्यवस्था करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन वस्तुओं का किया वितरण
इसी परिस्थिति में एनएचआरसीसीबी की टीम ने प्रभावित परिवारों के बीच चावल, सब्जियां, नारियल तेल, नहाने का साबुन, कपड़े धोने का साबुन, शॉल और अच्छी स्थिति में उपलब्ध उपयोगी पुराने कपड़े वितरित किए। राहत सामग्री ने प्रभावित परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को कुछ हद तक आसान किया।
राहत वितरण में इनका रहा योगदान
इस सेवा कार्य में एनएचआरसीसीबी बस्तर संभागीय टीम के जगमोहन सोनी, प्रेमदास मानिकपुरी, योगेंद्र कश्यप, नवीन एक्का और रविराज पटनायक ने सक्रिय सहयोग किया। वहीं जिला टीम की श्रीमती मीनू सिंह, श्रीमती विद्या सिंह, श्रीमती किरण नथानी और श्रीमती तेजस्विता घोष ने भी राहत वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पूरे राहत एवं सेवा कार्य में अक्षय देशमुख का विशेष योगदान रहा। सभी सदस्यों ने मिलकर प्रभावित परिवारों तक सामग्री पहुंचाई।
"मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म"
संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि आपदा के बाद पानी उतर जाना राहत की शुरुआत है, अंत नहीं। प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए समय और सहयोग दोनों की जरूरत होती है। उनका कहना है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और संस्था का प्रयास है कि संकट के बाद भी प्रभावित परिवारों को यह महसूस हो कि समाज उनके साथ खड़ा है।
भाटागुड़ा और आमाखूनी के परिवारों के लिए राहत सामग्री भले ही छोटी मदद हो, लेकिन बाढ़ के बाद की परिस्थितियों में जरूरत का सामान किसी बड़े सहारे से कम नहीं। घरों में लौटती जिंदगी और बच्चों के चेहरों पर वापस आती सामान्य मुस्कान के बीच इस मदद ने प्रभावित परिवारों को फिर से संभलने का हौसला दिया। ग्रामीणों ने एनएचआरसीसीबी की पूरी टीम के प्रति आभार जताया।
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