ग्राम डोगाम में वेटनरी पॉलिटेक्निक जगदलपुर द्वारा रेबीज जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, बच्चों को बताए बचाव के उपाय
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| ग्राम डोगाम की पूर्व माध्यमिक शाला में वेटनरी पॉलिटेक्निक जगदलपुर द्वारा आयोजित रेबीज जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जानकारी देते विशेषज्ञ। |
विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम — "Stronger Together"
इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम "Stronger Together" (मिलकर अधिक मजबूत) है, जो रेबीज की रोकथाम एवं उन्मूलन के लिए मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, समुदाय, स्वास्थ्यकर्मियों, पशु चिकित्सकों, शिक्षकों एवं विभिन्न संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित करती है। इसी भावना के अनुरूप ग्राम डोगाम में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को One Health (एक स्वास्थ्य) की अवधारणा के माध्यम से मानव एवं पशु स्वास्थ्य के आपसी संबंध के बारे में जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम में वेटनरी पॉलिटेक्निक, जगदलपुर के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नितेश कुमार कुंभकार, सहायक प्राध्यापक डॉ. देवेश कुमार गिरी, टीचिंग असिस्टेंट डॉ. प्रतिभा तांती एवं टीचिंग असिस्टेंट डॉ. भूपिका देवांगन प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए रेबीज के कारण, संक्रमण के माध्यम, लक्षण, रोकथाम तथा पशु के काटने के बाद की जाने वाली आवश्यक कार्रवाई के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
"समय पर सावधानी से रोका जा सकता है जोखिम" — डॉ. नितेश कुंभकार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. नितेश कुमार कुंभकार ने कहा कि रेबीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर उचित सावधानी और चिकित्सकीय देखभाल से इसके जोखिम को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपरिचित या आवारा कुत्तों तथा अन्य पशुओं के पास जाने या उन्हें छेड़ने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों में जागरूकता पैदा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर खेलते समय पशुओं के संपर्क में आते हैं।
"घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से धोएं" — डॉ. देवेश गिरी
डॉ. देवेश कुमार गिरी ने विद्यार्थियों को रेबीज के संक्रमण के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि विशेषकर काटने अथवा खरोंच लगने पर संक्रमित पशु की लार के माध्यम से वायरस मनुष्य तक पहुंच सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी पशु के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रेबीज की रोकथाम किसी एक व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समुदाय, पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
पशुओं के सुरक्षित व्यवहार की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रतिभा तांती ने विद्यार्थियों को पशुओं के सुरक्षित व्यवहार एवं पशु-मानव संपर्क के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि किसी अपरिचित पशु को खाना खिलाने, उसके बच्चों के पास जाने या उसे परेशान करने से बचना चाहिए। उन्होंने पालतू कुत्तों के नियमित टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
रेबीज के लक्षणों के बारे में किया जागरूक
डॉ. भूपिका देवांगन ने विद्यार्थियों को रेबीज के प्रमुख लक्षणों एवं बीमारी की गंभीरता के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि पशु के काटने के बाद बीमारी के लक्षणों की प्रतीक्षा करना उचित नहीं है। संभावित जोखिम की स्थिति में तत्काल घाव की सफाई तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे कार्यक्रम में प्राप्त जानकारी को अपने परिवार एवं समुदाय के अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं।
बच्चों को दिए गए ये महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम में बच्चों को विशेष रूप से यह जानकारी दी गई —
| क्रम | सुझाव |
|---|---|
| 01 | पशु के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं |
| 02 | घाव को अनावश्यक रूप से ढकने या घरेलू उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लें |
| 03 | स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार आवश्यक टीकाकरण एवं उपचार करवाएं |
| 04 | अपरिचित या आवारा पशुओं के पास जाने से बचें |
| 05 | पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं |
प्रश्नोत्तरी एवं संवादात्मक सत्र
जागरूकता कार्यक्रम को रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तरी एवं संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया। बच्चों ने रेबीज, कुत्तों के व्यवहार, पशु टीकाकरण तथा पशु काटने की स्थिति में प्राथमिक कदमों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सरल भाषा में समाधान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि रेबीज की रोकथाम में पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण एक महत्वपूर्ण उपाय है। साथ ही, आवारा पशुओं के प्रति सुरक्षित एवं संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा बच्चों को उनसे उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई।
स्कूल परिवार ने की सराहना
पूर्व माध्यमिक शाला, डोगाम की हेडमास्टर अनुषा जॉन, अध्यापक अखिलेश सिन्हा एवं विद्यार्थियों ने वेटनरी पॉलिटेक्निक, जगदलपुर की टीम द्वारा आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों के बीच इस प्रकार के स्वास्थ्य एवं पशुजनित रोगों संबंधी जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि बच्चे अपने परिवारों तक स्वास्थ्य एवं पशु सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने में प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
"सतर्क रहें, पशुओं के साथ सुरक्षित व्यवहार करें"
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि — "सतर्क रहें, पशुओं के साथ सुरक्षित व्यवहार करें, पशु के काटने या खरोंचने पर तुरंत घाव धोएं और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।" विद्यार्थियों ने भी रेबीज से बचाव संबंधी जानकारी अपने परिवार एवं आसपास के लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस प्रकार वेटनरी पॉलिटेक्निक, जगदलपुर द्वारा ग्राम डोगाम के मध्य विद्यालय के बच्चों के लिए आयोजित यह रेबीज जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को पशुजनित रोगों से बचाव, जिम्मेदार पशु व्यवहार तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
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