शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में ‘विद्यालय, संस्कृति, प्रबंध एवं शिक्षक’ पुस्तक का विमोचन

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर में ‘विद्यालय, संस्कृति, प्रबंध एवं शिक्षक’ पुस्तक का विमोचन

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर के बी.एड. भवन, कालीपुर में मंच पर कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव एवं अन्य गणमान्यजनों द्वारा ‘विद्यालय, संस्कृति, प्रबंध एवं शिक्षक’ पुस्तक का प्रदर्शन करते हुए।
शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर के बी.एड. भवन, कालीपुर में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रभारी कुलसचिव डॉ. अभिषेक अवस्थी, प्रो. शरद नेमा, प्रो. एम. एस. मिश्रा, डॉ. सजीवन कुमार, डॉ. समीर ठाकुर, डॉ. विनोद सोनी ‘विद्यालय, संस्कृति, प्रबंध एवं शिक्षक’ पुस्तक का प्रदर्शन करते हुए।
जगदलपुर, 02 अक्टूबर 2026। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर के बी.एड. भवन, कालीपुर में आज शिक्षा के क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तक ‘विद्यालय, संस्कृति, प्रबंध एवं शिक्षक’ का गरिमामय विमोचन किया गया। पुस्तक के लेखक डॉ. विनय प्रताप सिंह, सहायक प्राध्यापक, शिक्षा अध्ययनशाला, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर एवं श्री अमित कुमार हैं।

यह पुस्तक विद्यालयी शिक्षा के विविध आयामों को समग्र दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। इसमें विद्यालय, संस्कृति, शैक्षिक प्रबंधन तथा शिक्षक की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित विचार एवं शैक्षिक विमर्श को स्थान दिया गया है। पुस्तक का उद्देश्य भावी शिक्षकों, शिक्षक-शिक्षकों, शोधार्थियों तथा शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अध्येताओं को विद्यालयी व्यवस्था और शिक्षक की बदलती भूमिका को समझने के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।

कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव का संबोधन

विमोचन अवसर पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव जी ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने का केंद्र नहीं है, बल्कि वह संस्कृति, मूल्यों, सामाजिक चेतना, नेतृत्व एवं व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण संस्थान भी है। ऐसे में विद्यालयी संस्कृति और प्रभावी शैक्षिक प्रबंधन के साथ शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। पुस्तक इन सभी पक्षों को एक साथ समझने का प्रयास करती है।

लेखक डॉ. विनय प्रताप सिंह का वक्तव्य

पुस्तक के लेखक डॉ. विनय प्रताप सिंह ने कहा कि “एक शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, मूल्यों और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इस पुस्तक के माध्यम से विद्यालय, संस्कृति, प्रबंधन और शिक्षक के बीच के अंतर्संबंधों को समझने का प्रयास किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक को विशेष रूप से बी.एड., एम.एड. के विद्यार्थियों, शिक्षक-प्रशिक्षकों, शोधार्थियों एवं शिक्षा से जुड़े अध्यापकों के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है।

गणमान्यजनों की उपस्थिति में विमोचन

पुस्तक का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव जी, प्रभारी कुलसचिव डॉ. अभिषेक अवस्थी जी, प्रो. शरद नेमा जी, प्रो. एम. एस. मिश्रा जी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सजीवन कुमार जी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. समीर ठाकुर जी, डॉ. विनोद सोनी जी एवं डॉ. सुकृता तिर्की जी के कर कमलों से हुआ।

इस मौके पर शिक्षा अध्ययनशाला से सुश्री चंद्रकली, सुश्री इन्दु सिदार और अन्य विभागों से प्राध्यापकगण, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं शिक्षा क्षेत्र के अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों ने लेखक डॉ. विनय प्रताप सिंह को पुस्तक प्रकाशन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के अकादमिक प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

Post a Comment

Previous Post Next Post