आदिवासी किसानों को कंद फसलों की उन्नत खेती का प्रशिक्षण: टाकरागुड़ा के किसान हुए शामिल
बस्तर/जगदलपुर। आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में कंद फसलों (Root Crops) के उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से, परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (जेडएआरएस), कुम्हरावण्ड में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय समन्वित कन्द फसल अनुसंधान परियोजना के तहत आदिवासी उपयोजना के अन्तर्गत रखा गया था।
मुख्य बिंदु
स्थान: परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, कुम्हरावण्ड, जगदलपुर
आयोजन: अखिल भारतीय समन्वित कन्द फसल अनुसंधान परियोजना
मुख्य उद्देश्य: कंदीय फसलों (जैसे- शकरकंद, अरबी, जिमीकंद आदि) की उन्नत खेती की जानकारी देना।
प्रतिभागी: ग्राम टाकरागुड़ा, विकासखंड लोहण्डीगुड़ा से आए 25 से अधिक आदिवासी किसान।
प्रशिक्षण में क्या रहा खास?
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि डॉ. आर. एस. नेताम, अधिष्ठाता, शहीद गुण्डाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, जगदलपुर ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने बस्तर की जलवायु में कन्द वर्गीय फसलों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. नेताम ने कहा कि कम लागत में अधिक उपज देने वाली ये फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं, साथ ही पोषण सुरक्षा में भी सहायक हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी:
खरपतवार प्रबंधन: डॉ. ए.के. ठाकुर, सह-संचालक अनुसंधान ने किसानों को कंदीय फसलों में खरपतवारों के नियंत्रण की वैज्ञानिक विधियाँ बताईं, जिससे फसल की पैदावार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।
उत्पादन तकनीक और भ्रमण: परियोजना प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर ने किसानों को कन्द फसल प्रक्षेत्र (फील्ड) का भ्रमण कराया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग कंदीय फसलों की उन्नत किस्मों और उनकी वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया।
कीट एवं रोग प्रबंधन: डॉ. एन.सी. मण्डावी ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और उनसे बचाव के उपाय बताए। वहीं, श्री प्रहलाद नेताम ने कंदीय फसलों में होने वाली सामान्य बीमारियों की पहचान और उनके समाधान पर चर्चा की।
भंडारण तकनीक: डॉ. गुंजा ठाकुर ने कंद फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उनके भंडारण की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
किसानों के बीच सामग्री का वितरण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी किसानों को कृषि कैलेण्डर 2026, कोचई (कंद) एवं अन्य सब्जियों के बीज, साथ ही खेती के लिए कुदाली (कृषि उपकरण) का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को व्यवहारिक रूप से प्रोत्साहित करना है।
इस अवसर पर डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. विनिता पाण्डेय, डॉ. चेतना खाडेकर, सोमा बन्छोर, शालिनी और रिचा सहित केन्द्र के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन परियोजना प्रभारी डॉ. पद्माक्षी ठाकुर ने किया।
