सहकारी कर्मचारियों को बजट में बड़ी सौगात? चार सूत्रीय मांगों पर सरकार का सकारात्मक संकेत
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| रायपुर: सहकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर पटेल भवन में हुई अहम बैठक। |
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सहकारी कर्मियों और धान खरीदी ऑपरेटरों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को मानने का भरोसा दिलाया है। इस बात की जानकारी रविवार को पटेल भवन, तुता, नया रायपुर में आयोजित एक संयुक्त बैठक के बाद दी गई।
बैठक में छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और छत्तीसगढ़ धान खरीदी ऑपरेटर संघ महासंघ के पदाधिकारियों ने मिलकर अपनी लंबित चार सूत्रीय मांगों और धान उठाव के मुद्दों पर गहन चर्चा की। प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू ने बताया कि संगठन को उम्मीद है कि आगामी मार्च में पेश होने वाले बजट सत्र में इन मांगों पर मुहर लग जाएगी।
सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि छत्तीसगघ शासन ने दो प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है:
प्रबंधकीय अनुदान: मध्य प्रदेश की तर्ज पर प्रत्येक सहकारी समिति को कर्मचारियों के वेतन के लिए तीन-तीन लाख रुपए प्रति वर्ष देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए अंतर विभागीय कमेटी की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
परिवहन खर्च: वर्ष 2024-25 में धान परिवहन के दौरान हुई अतिरिक्त ढुलाई (सुखद) की राशि देने के लिए पत्र जारी कर दिया गया है। संगठन की मांग थी कि यह पूरा खर्च समितियों को दिया जाए और इसे कमीशन से न काटा जाए।
अभी भी ये मांगें बाकी
हालांकि, संगठन की कुछ मांगें अभी भी लंबित हैं, जिनमें शामिल हैं:
ऑपरेटरों को 12 महीने का वेतन देकर उनका नियमितीकरण किया जाए।
सेवा नियम 2018 में संशोधन कर जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में समिति प्रबंधकों की 50% भर्ती जल्द से जल्द की जाए।
इन मांगों को लेकर प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार (कल) संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात करेगा और उन्हें एक ज्ञापन सौंपेगा।
आंदोलन स्थगित, लेकिन निगाहें बजट पर
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि 19 दिनों तक चले आंदोलन और माननीय अशोक बजाज जैसे वरिष्ठ नेताओं के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था और धान खरीदी का काम सफलतापूर्वक किया। अब उनकी निगाहें बजट सत्र पर टिकी हैं।
आगे की रणनीति
बैठक में कांकेर से लेकर कोरिया तक लगभग आधा सैकड़ा प्रदेश पदाधिकारी मौजूद थे। यदि सरकार ने शेष मांगों पर भी जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो दोनों संगठनों की फिर से बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में प्रमुख रूप से ईश्वर श्रीवास, घनश्याम कवर्धा, अवध साहू, रोहित डडसेना, अजय साहू, वेद प्रकाश वैष्णव, प्रमोद यादव, ऋषिकांत मोहरे, संतोष साहू, नरेश साहू, जय राम और बल्देव राम साहू सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
