हम बस्तरिया बस्तीदार एवं देवकोठार ने जगाई पर्यावरण चेतना, दलपत सागर संरक्षण के लिए हुआ विशेष आयोजन
जगदलपुर, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "हम बस्तरिया बस्तीदार एवं देवकोठार (बस्तर)" समूह के तत्वावधान में दलपत सागर मेड पर एक विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े मानव निर्मित तालाब दलपत सागर, जिसका निर्माण महाराज दलपत देव ने कराया था, उसके संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया।
शुक्रवार सुबह दलपत सागर मेड के सामने पर्यावरण संरक्षण और दलपत सागर के अस्तित्व को बचाने के संदेश के साथ विशेष पर्यावरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों, कवियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य जगदलपुर की पहचान रहे दलपत सागर की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करना तथा नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम स्थल पर पर्यावरण प्रेमियों द्वारा दलपत सागर किनारे स्थित वृक्षों पर लाल रिबन बांधे गए तथा पर्यावरण बचाने के संदेश लिखे तख्त प्रदर्शित किए गए।
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| जगदलपुर में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संकट और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देती स्कल कलाकृति के साथ फोटो खिंचवाते पर्यावरण प्रेमी। |
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण एक प्रतीकात्मक कलाकृति रही, जिसमें एक पेड़ के साथ मानव खोपड़ी (स्कल) का प्रदर्शन किया गया था। इस कलाकृति के माध्यम से संदेश दिया गया कि यदि पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में दलपत सागर का अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान पर्यावरण प्रेमी सुभाष श्रीवास्तव द्वारा सूखे वृक्षों को आकर्षक रंगों से सजाया गया था। इन वृक्षों पर बनाई गई कलाकृतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वृक्ष देव स्थापना, वृक्ष हरितलेपन एवं वृक्ष रक्षा शपथ के साथ हुई। इसके पश्चात पर्यावरण चर्चा एवं चित्रावलोकन के माध्यम से उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
बस्तरिया पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा का संचार किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुभाष श्रीवास्तव, सुभाष पांडे, हिमांशु शेखर झा, मदन आचार्य, अनिल लुंकड़, शशांक शेंडे, निर्मल सिंह राजपूत, उर्मिला आचार्य, खुदेजा खान, ऐश्वर्य राजपूत, डॉ. पूर्णिमा सरोज, अनिता राज, लक्ष्मी सिंह, स्टेनली जॉन, जगदीश दास, डॉ. राजीव निगम, डॉ. सतीश, रत्नेश बेंजामिन, विधु शेखर झा, खेमसिंह देवांगन (नगर निगम सभापति), निर्मल पाणिग्राही, सुनील पांडे, अजय श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव, नबी मोहम्मद, शकील अहमद, रामप्रसाद पांडे, संजय पांडे (महापौर), योगेंद्र पांडेय, भादुराम कश्यप, अनंतराम कश्यप, मुन्नाराम कश्यप, योगिता कश्यप, संग्राम सिंह राणा, प्रकाश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के जनसंपर्क अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इस दिशा में कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग है।
आयोजन के अंत में उपस्थित नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा तथा हरित आवरण बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि "हम बस्तरिया बस्तीदार एवं देवकोठार" केवल सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक धरोहरों, जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लगातार जनजागरण अभियान चलाता रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

