बस्तर MDA अभियान: डीएमओ एसएस टेकाम बोले- 'छिपकर वार करती है फाइलेरिया, दवा जरूर खाएं'

बस्तर में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान: 2.76 लाख लोगों ने खाई दवा, अब छूटे हुए लोगों के लिए विशेष अभियान

बस्तर जिले के बकावण्ड ब्लॉक में स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया (हाथीपाँव) से बचाव की दवा खिलाते हुए, MDA अभियान 2026
बस्तर जिले में चल रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाते हुए। 
जगदलपुर। बकावण्ड  (बस्तर) राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले के तीन विकासखंडों बकावण्ड, बस्तर और तोकापाल में चल रहे सामूहिक दवा सेवन (MDA) कार्यक्रम को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। 10 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 2,76,258 लोग दवा का सेवन कर चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने इन तीनों विकासखंडों में कुल 4,42,350 लोगों को हाथीपाँव (फाइलेरिया) से बचाने की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा है। यह अभियान 25 फरवरी तक जारी रहेगा।

'तीनों ब्लॉक के सभी लोगों को दवा खिलाना ही लक्ष्य'

अभियान की प्रगति और लोगों में व्याप्त भ्रांतियों पर जिला मलेरिया अधिकारी (DMO) बस्तर, एस.एस. टेकाम ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य तीनों ब्लॉक के सभी पात्र नागरिकों तक दवा पहुंचाना है।

उन्होंने कहा,

"हमारा लक्ष्य तीनों ब्लॉक बकावण्ड, बस्तर और तोकापाल के प्रत्येक व्यक्ति को यह दवा खिलाना है। यह कोई चुनिंदा लोगों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय को सुरक्षित रखने की मुहिम है।"

क्या दवा के साइड इफेक्ट होते हैं? डॉ. टेकाम ने दिया जवाब

अक्सर लोगों के मन में दवा के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) को लेकर संशय रहता है। इस पर डॉ. टेकाम ने स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है।

उन्होंने कहा,

"आज तक इस दवा के सेवन से किसी को कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ है। हां, अगर किसी व्यक्ति के शरीर में पहले से ही फाइलेरिया के कीड़े (माइक्रोफाइलेरिया) मौजूद हैं, तो उन्हें हल्की एलर्जी या बुखार जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है। यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि दवा असर कर रही है और शरीर से कीड़े साफ हो रहे हैं। लेकिन यह किसी भी सूरत में हानिकारक नहीं है।"

'हाथीपाँव: छिपकर वार करने वाली बीमारी'

डॉ. टेकाम ने फाइलेरिया को "साइलेंट किलर" बताते हुए लोगों को जागरूक होने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह बीमारी तुरंत लक्षण नहीं दिखाती, बल्कि शरीर के अंदर धीरे-धीरे असर करती है।

उन्होंने समझाया,

*"फाइलेरिया एक छिपकर वार करने वाली बीमारी है। शुरुआत में कोई लक्षण नजर नहीं आते। संक्रमण के 10 से 15 साल बाद यह हाथीपाँव, हाइड्रोसील या हाथ-पैरों में सूजन के रूप में फूटकर सामने आती है। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और इसका इलाज संभव नहीं होता। इसलिए बचाव ही एकमात्र उपाय है और दवा खा लेना ही सबसे बेहतर है।"*

'जो छूट गए, उन्हें घर-घर जाकर खिलाएंगे'

अभियान की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि तीनों विकासखंडों में 935 टीमें कार्यरत हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को दवा खिला रही हैं।

उन्होंने बताया,

"हमारी टीमों ने अब तक जितने भी लोगों को दवा खिलाना था, उनमें से अधिकांश को खिला दिया गया है। अब हम दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे हैं। हम फिर से घर-घर सर्वे करेंगे और जो लोग किसी कारणवश दवा लेने से छूट गए हैं, उन्हें चिन्हित करके उन्हें दवा खिलाई जाएगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति इस सुरक्षा कवच से वंचित न रह जाए।"

स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे आने वाली स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें और हाथीपाँव से बचाव की निःशुल्क दवा का सेवन अवश्य करें।

basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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