आरटीई प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग: निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन

आरटीई प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन, डीईओ बोले- 'फैसला सरकार को लेना है'

बस्तर कलेक्टोरेट में निजी स्कूल संघ के पदाधिकारी डीईओ बलीराम कश्यप को आरटीई प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए।
बस्तर के निजी स्कूल संचालक डीईओ बलीराम कश्यप को ज्ञापन सौंपते हुए।

बस्तर/जगदलपुर। राज्य सरकार द्वारा पिछले 13 वर्षों से शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति (रिम्बर्समेंट) राशि में बढ़ोतरी न किए जाने से नाराज निजी स्कूल प्रबंधन ने असहयोग आंदोलन का एलान कर दिया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को बस्तर कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालक (शिक्षा) को ज्ञापन सौंपा।

हाईकोर्ट ने भी मांगा था जवाब
बता दें कि इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें प्रति छात्र प्रतिपूर्ति राशि को संशोधित करने की मांग की गई थी। याचिका में मांग की गई है:

  • प्राथमिक कक्षा: 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति वर्ष।

  • माध्यमिक कक्षा: 11,500 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति वर्ष।

  • हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी: 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति वर्ष।

हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश दिया था कि वे इस मांग पर 6 माह के भीतर उचित निर्णय लें।

असहयोग आंदोलन का एलान
निजी स्कूल प्रबंधकीय संगठन के सचिव नीलोत्पल दत्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की है। उन्होंने असहयोग आंदोलन की जानकारी देते हुए कहा कि:

  • निजी स्कूल अब स्कूल शिक्षा विभाग, डीईओ या नोडल प्राचार्य के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे।

  • विभागीय अधिकारियों के किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब नहीं देंगे।

श्री दत्ता ने स्पष्ट किया, "यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य सरकार प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं ले लेती। 13 वर्षों से प्रतिपूर्ति दर यथावत रहने से स्कूलों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।"

डीईओ बोले- 'मामला सरकार स्तर का'
वहीं, इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बलीराम कश्यप ने अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह मामला सरकार (गवर्नमेंट) से संबंधित है। यह डीईओ स्तर की बात नहीं है। निजी स्कूलों का ज्ञापन संचालक और सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग) को भेजा जाएगा। उनका ज्ञापन हमारे स्तर का मामला नहीं है। फैसला (डिसीजन) सरकार को लेना है।" उनके इस बयान से साफ है कि जिला प्रशासन इस मामले में अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले सकता और पूरा मामला राज्य सरकार के उच्च स्तर पर विचाराधीन है।

आगे की राह
फिलहाल डीईओ कार्यालय द्वारा ज्ञापन को राज्य शासन को भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट की 6 महीने की समयसीमा और निजी स्कूलों के इस आंदोलन के बीच क्या रुख अपनाती है।


basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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