बस्तर दशहरा पर रथ निर्माण का कार्य शुरू, आठ चक्का वाला विजय रथ बना रहे ग्रामीण कारीगर
जगदलपुर | 06 अक्टूबर 2026
जगदलपुर। करीब 75 दिनों तक मनाए जाने वाले बस्तर दशहरा पर दो मंजिला रथ का संचालन किया जाता है। यह परंपरा 620 साल से अनवरत जारी है। नवरात्र से प्रतिदिन रथ की परिक्रमा होनी है।
सिरहासार भवन के सामने रथ निर्माण में जुटे झाड़ उमरगांव से आए ग्रामीण कारीगर।
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इस दो मंजिला रथ का निर्माण बस्तर अंचल के अलग-अलग गांव से आए हुए ग्रामीण कारीगर करने जगदलपुर पहुंच गए हैं। झाड़ उमरगांव से यह शिल्पकार आए हैं। तीस से अधिक यह सभी कारीगर परंपरागत औजारों से रथ का निर्माण करेंगे। मंगलवार की सुबह विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर यह सभी अपने काम में जुटे हुए हैं।
सिरहासार भवन के सामने यह रथ निर्माण किया जा रहा है। रथ निर्माण के लिए दरभा के जंगल से साल व सागौन की लकड़ियों को लाई गई है। यहां करीब 6 ट्रक में भरकर 55 घन मीटर लकड़ियां लाई गई हैं। खास बात यह है कि समूचे रथ निर्माण में लोहे की कील नहीं उपयोग में लाई जाती है। इस दफे आठ चक्कों वाले विजय रथ का संचालन होना है।
यह है मान्यता
मान्यता के अनुसार बस्तर राजा का जगन्नाथ पुरी के राजा ने रथ पति की उपाधि दी थी। उन्हें 16 चक्कों का एक रथ भी संचालन करने दिया गया था। कालांतर में इस 16 चक्का के रथ को तीन भाग में बांट दिया गया है। इसमें चार चक्का का रथ गोंचा पर्व पर भगवान जगन्नाथ को समर्पित किया गया है। इसके बाद आठ चक्कों का विजय रथ व चार चक्कों का फूल रथ की परिक्रमा नवरात्र पर होती है। इन रथ पर आराध्य देवी माता दंतेश्वरी व माता मावली के छत्र को रखा जाता है।
