शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में मानवशास्त्रीय अनुसंधान की नैतिक चुनौतियों पर विशेष व्याख्यान आयोजित
जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शनिवार को मानव विज्ञान एवं जनजातीय अध्ययनशाला में 'डीलिंग विद इथिकल इशू इन एंथ्रोपोलॉजिकल रिसर्च' विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्कल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रसन्ना पात्रा बतौर रिसोर्स पर्सन उपस्थित थे।मानव जैविक रूप से समान, सांस्कृतिक स्तर पर कोई समाज उच्च नहीं — प्रो. पात्रा
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में प्रो. पात्रा ने कहा कि मानव विज्ञान में हम सब मानव और मानव के बीच अंतर का अध्ययन करते हैं, पर यह सच्चाई है कि विश्व के सारे मानव जैविक रूप से समान हैं। रंग, आकार इत्यादि अलग होने के बावजूद मात्र 0.01 प्रतिशत ही अंतर है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी समाज या मानव सांस्कृतिक स्तर पर एक-दूसरे से उच्च नहीं है।
शोध में नैतिकता और होलिस्टिक स्टडी पर जोर
उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान डाटा कलेक्शन के साथ-साथ लेखन में भी नैतिकता पर ध्यान देना जरूरी है। मानव शास्त्रीय अनुसंधान में होलिस्टिक स्टडी करते हुए एक विषय के विभिन्न पक्षों पर अध्ययन कर समस्या को समझने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे रिसर्च के लिए फील्ड वर्क और प्राइमरी डेटा जरूरी है। प्रो. पात्रा ने कहा कि आज भी समाज में पितृसत्तामकता के कारण सही डेटा संकलन में परेशानी आती है।
AI युग में शोध नियमों का पालन जरूरी
प्रो. पात्रा ने कहा कि आधुनिक रिसर्च के दौरान सही आंकड़े, चित्र, रिफ्रेंस, प्लेगरिज्म पर सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आज रिसर्च पेपर, प्रपोजल, प्रबंध इत्यादि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी जांचे जा रहे हैं, इसलिए शोध नियमों का पालन होना आवश्यक है। उन्होंने युवा शोधार्थियों को टेक्नोलॉजी से डरने की बजाय उसे अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
इससे पहले विभागाध्यक्ष प्रो. स्वपन कुमार कोले ने स्वागत उद्बोधन में रिसर्च इथिक्स पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारदा देवांगन ने किया। इस मौके पर दंतेश्वरी पीजी कन्या महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. भुनेश्वर कुमार, अतिथि व्याख्याता डॉ. लखन लाल विश्वकर्मा, डॉ. प्रकाश एवं विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
