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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में व्यवसाय एवं वाणिज्य की बदलती संभावनाओं पर विशेष व्याख्यान आयोजित

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में व्यवसाय एवं वाणिज्य की बदलती संभावनाओं पर विशेष व्याख्यान आयोजित

शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में व्यवसाय एवं वाणिज्य विषय पर विशेष व्याख्यान में विद्यार्थियों को संबोधित करते प्रो. मनोज वर्गीज़ एवं प्रो. ओ.पी. गुप्ता
शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर की व्यवसायिक प्रबंधन अध्ययनशाला द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में विद्यार्थियों को संबोधित करते मुख्य वक्ता प्रो. मनोज वर्गीज़ एवं प्रो. ओ.पी. गुप्ता।
जगदलपुर, 11 अक्टूबर 2026। शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर की व्यवसायिक प्रबंधन अध्ययनशाला द्वारा बी.बी.ए., एम.बी.ए. एवं वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए शुक्रवार को "Navigating Business & Commerce in the Age of Artificial Intelligence" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में व्यवसाय एवं वाणिज्य के बदलते स्वरूप, करियर निर्माण, उद्यमशीलता तथा व्यावहारिक व्यावसायिक कौशल के प्रति जागरूक करना था।

मुख्य वक्ता प्रो. मनोज वर्गीज़ ने दिए सफलता के सूत्र

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. मनोज वर्गीज़, डायरेक्टर, प्रबंधन एवं वाणिज्य अध्ययनशाला, रुंगटा इंटरनेशनल स्किल यूनिवर्सिटी, भिलाई उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सफलता के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास तथा व्यावहारिक ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रो. वर्गीज़ ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में लागू करना, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करना तथा उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग करना भी आवश्यक है। उन्होंने पिग्मेलियन सिद्धांत (Pygmalion Theory) एवं अपेक्षाओं की शक्ति (Power of Expectation) का उल्लेख करते हुए बताया कि सकारात्मक अपेक्षाएं, आत्मविश्वास और सही मानसिकता व्यक्ति के प्रदर्शन एवं उपलब्धियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन एवं करियर के लिए स्पष्ट विजन और मिशन निर्धारित करने तथा सुनियोजित कार्ययोजना के साथ लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

खरगोश और कछुए की कहानी से समझाया निरंतरता का महत्व

व्याख्यान के दौरान खरगोश और कछुए की प्रसिद्ध कहानी के माध्यम से निरंतरता, धैर्य, समय प्रबंधन एवं आत्मविश्लेषण का महत्व समझाया गया। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन, निरंतर अभ्यास और गलतियों से सीखने की क्षमता भी आवश्यक है। टीमवर्क पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग, समन्वय और प्रत्येक सदस्य की क्षमताओं का उचित उपयोग बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायक होता है। खेल जगत के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने टीम भावना तथा सामूहिक उपलब्धियों के महत्व को भी स्पष्ट किया।

प्रो. ओ.पी. गुप्ता ने सकारात्मक दृष्टिकोण एवं आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

कार्यक्रम में प्रो. ओ.पी. गुप्ता, प्रोफेसर, खैरागढ़ कॉलेज ने सफलता, सकारात्मक दृष्टिकोण एवं विद्यार्थियों की मानसिकता में बदलाव के महत्व पर प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए केवल ज्ञान अर्जित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने दृष्टिकोण, व्यवहार और कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाना भी आवश्यक है। ज्ञान सफलता की मजबूत नींव है, जबकि सकारात्मक सोच और सही कार्यशैली व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने में सहायता करती हैं।

उन्होंने जापान सहित अन्य देशों के विद्यार्थियों के उदाहरण देते हुए पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने, अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान कार्यानुभव प्राप्त करना, अपनी क्षमता के अनुसार आय अर्जित करना तथा वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझना विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और व्यावसायिक विकास में उपयोगी हो सकता है।

छोटे व्यवसायों से सीखें व्यावसायिक कौशल

प्रो. ओ.पी. गुप्ता ने विद्यार्थियों को व्यवसाय की बारीकियों को समझने के लिए स्थानीय दुकानों, ठेलों तथा छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों का अवलोकन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करके ग्राहक व्यवहार, विपणन रणनीति, उत्पाद चयन, बिक्री तकनीक तथा ग्राहक संतुष्टि जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक पहलुओं को व्यावहारिक रूप से समझा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, अंशकालिक कार्य तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अवलोकन के माध्यम से प्रबंधन, संचार, ग्राहक सेवा एवं उद्यमशीलता संबंधी कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में व्यावहारिक ज्ञान का महत्व

कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण व्यवसाय एवं वाणिज्य के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक रहने, नवाचार अपनाने तथा बदलती व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक व्यावसायिक परिवेश में तकनीकी ज्ञान के साथ निर्णय क्षमता, संचार कौशल, समस्या समाधान, रचनात्मक सोच एवं टीमवर्क भी महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. समीर ठाकुर ने दिया सकारात्मक सोच का संदेश

इस अवसर पर डॉ. समीर ठाकुर, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण (Dean, Students Welfare) ने भी विद्यार्थियों को आधुनिक व्यावसायिक परिवेश में सफलता प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य, व्यावहारिक अनुभव, आत्मनिर्भरता, टीमवर्क एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने का संदेश दिया।

प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में शिवम सोनवानी, सहायक प्राध्यापक, प्रबंधन; डॉ. अनिल कुमार भारद्वाज; डॉ. सृष्टि चांडक; डॉ. लक्ष्मण तथा डॉ. उज्ज्वल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बी.बी.ए., एम.बी.ए. एवं वाणिज्य के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और विशेषज्ञों के विचारों से लाभान्वित हुए।

आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के अंत में डॉ. रश्मि देवांगन, विभागाध्यक्ष, व्यवसायिक प्रबंधन एवं वाणिज्य अध्ययनशाला, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर ने मुख्य वक्ता प्रो. मनोज वर्गीज़ तथा प्रो. ओ.पी. गुप्ता के प्रति उनके प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक विचारों के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, उपस्थित प्राध्यापकों तथा कार्यक्रम में सहभागी विद्यार्थियों के सहयोग के लिए भी आभार प्रकट किया।

डॉ. रश्मि देवांगन ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन, कौशल विकास, व्यक्तित्व निर्माण एवं करियर नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम से प्राप्त सीख को अपने शैक्षणिक जीवन एवं भविष्य के व्यावसायिक कार्यों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।


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मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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