जगदलपुर: कलरव संगीत संस्था की "रंग-ए-महफ़िल" में गीत-ग़ज़लों की शाम, कलाकारों का सम्मान
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| "जगदलपुर के शौर्य भवन में कलरव की रंग-ए-महफ़िल कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ कुमार सिन्हा द्वारा कलरव के कलाकार को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए" |
जगदलपुर, बस्तर | 12 अक्टूबर 2026: स्थानीय संगीत संस्था कलरव ने शौर्य भवन में "रंग-ए-महफ़िल" कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति दी। इस अवसर पर गीत एवं ग़ज़ल की मधुर प्रस्तुतियों के साथ-साथ शहर के वरिष्ठ कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
कला मनीषी एवं कला चेतना सम्मान से नवाज़े गए कलाकार
कार्यक्रम में विपिन बिहारी दास, रतन व्यास एवं संध्या वैष्णव को कला मनीषी तथा दीपक वाधवानी, विश्वजीत साहा, बलराज शर्मा, वंदना पॉल, एम. बी. मंजूषा, शैलेश जारी एवं आर. के. नायडू को कला चेतना सम्मान से नवाज़ा गया।
मुख्य अतिथि एवं अध्यक्षता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य वन संरक्षक, जगदलपुर वन वृत्त सुश्री स्टाइलो मंडावी उपस्थित रहीं, जबकि अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ कुमार सिन्हा ने की। इस अवसर पर श्री सिन्हा की धर्मपत्नी भी मौजूद रहीं। कलरव संरक्षक एल. पी. सोनी एवं एडमिन आशा सोनी ने तीनों अतिथियों का स्वागत किया।
शलभ सिन्हा ने की कलरव के कार्यों की प्रशंसा
पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने कलरव के कार्यों की प्रशंसा करते हुए शौर्य भवन को ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए अनुकूल बताया, जहाँ बस्तर की कला निखर सके और जरूरतमंद कलाकारों को मंच मिल सके। वहीं मुख्य अतिथि सुश्री स्टाइलो मंडावी ने शास्त्रीय संगीत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संगीत को सुकून का आधार बताया।
गीत-ग़ज़लों की शाम, श्रोता अंत तक बंधे रहे
इसके बाद गानों का दौर चला, जिसमें एक से बढ़कर एक ग़ज़ल एवं सुगम संगीत प्रस्तुत किए गए। श्रीमती सिन्हा ने "झुकी-झुकी सी नज़र" गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया, वहीं श्री सिन्हा एवं सुश्री मंडावी ने भी अपनी गायकी से खासा प्रभावित किया।
कलाकारों में एल. पी. सोनी, आशा सोनी, डॉ. कुमार वीरेंद्र, सुषमा जे. नेताम, रेशमा अली, निशांत मिश्रा एवं अफ़ज़ल अली ने भी अपने गीत प्रस्तुत किए। श्री सोनी ने जगजीत सिंह के माता भजन से शुरुआत की, जिसके बाद तुझसे नाराज़ नहीं, नदिया किनारे, मेरा कुछ सामान, चिट्ठी ना कोई संदेश, करोगे याद, गरज बरस, दिल ढूँढता है, गहरे हल्के, हमें तुमसे प्यार, आप यूँ फासलों, तुमको देखा तो, किसी नज़र को, चमकते चाँद, तुम्हें देखती हूँ, चिट्ठी आई है जैसे नगमों से श्रोता अंत तक बंधे रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन गायत्री आचार्य ने किया, जबकि कलरव के कलाकारों को डॉ. ज्योति लागू ने स्मृति चिन्ह प्रदान किए।
