श्री वेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय में शिक्षा मनोविज्ञान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
विशेषज्ञों ने गुरु संस्कार से ज्ञान संस्कार की ओर बढ़ने की प्रक्रिया पर डाला प्रकाश
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| श्री वेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय, कंगोली में शिक्षा मनोविज्ञान संगोष्ठी का आयोजन। मंच पर संस्था अध्यक्ष कुंवर राज बहादुर सिंह राणा, डॉ. देवनारायण साहू एवं अन्य शिक्षकगण। |
जगदलपु। श्री वेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय, कंगोली में आज शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology) विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बी.एड. के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराना और उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहायता करना था।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विद्या भारती के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक एवं संगठन मंत्री डॉ. देवनारायण साहू ने शिक्षा और मनोविज्ञान के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एक कुशल शिक्षक बनने के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन पर नियंत्रण, अंतःकरण की क्रियाओं को समझना और गुरु संस्कार से ज्ञान संस्कार की ओर अग्रसर होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक का कर्तव्य केवल सूचनाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करना है। शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच का संबंध विश्वास, आदर और मार्गदर्शन पर आधारित होना चाहिए, तभी जाकर शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकता है।
शिक्षकों का आह्वान: सर्वांगीण विकास पर दें ध्यान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के अध्यक्ष कुंवर राज बहादुर सिंह राणा ने कहा कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानें और उसे निखारने के लिए निरंतर प्रयास करें।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य श्रीमती कामना वर्मा, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती भारती देवांगन, उप प्राचार्य अनिल श्रीवास सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक राजीव निगम, श्रीमती मिताली बिसवास, संदीप अमादिया, श्रीमती ज्योति सिंह, हेम पटेल, श्रीमती रिशु उपाध्याय और श्रीमती अंजली त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा।
संगोष्ठी में महाविद्यालय के बी.एड. के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षा मनोविज्ञान के व्यावहारिक पक्षों को समझा। कार्यक्रम का सफल एवं सुचारू संचालन देवेंद्र दास ने किया।
इस संगोष्ठी के माध्यम से भविष्य के शिक्षकों को एक आदर्श शिक्षक बनने की प्रेरणा मिली और उन्हें यह समझने का अवसर प्राप्त हुआ कि किस प्रकार मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर कक्षा कक्ष को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
