बस्तर की बेटी हेमलता ने मुख्यमंत्री योजना से बदली किस्मत, ग्रामीणों के लिए बनीं उद्यमिता की मिसाल
2 लाख ऋण से शुरू किया 'कश्यप किराना स्टोर्स, तीन साल में चुकाया कर्ज
![]() |
| हेमलता कश्यप अपनी दुकान 'कश्यप किराना स्टोर्स' पर। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना ने जिंदगी बदल दी। |
गांव की समस्या बनी मौका
बारहवीं पास हेमलता का परिवार कभी आर्थिक तंगी से जूझता था। महज एक एकड़ कृषि भूमि और छह सदस्यों वाले परिवार में उनके पिता पाकलु कश्यप की आमदनी से घर चलाना मुश्किल था। हेमलता हमेशा से कुछ करना चाहती थीं, लेकिन सही दिशा और पूंजी के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।
तभी एक दिन अखबार में छपी मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की खबर ने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने सोचा कि क्यों न गांव की ही एक बड़ी समस्या का समाधान किया जाए। दरअसल, माड़पाल गांव में किराने की कोई दुकान नहीं थी, जिससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए 10 किलोमीटर दूर नगरनार जाना पड़ता था।
जिला उद्योग केंद्र ने दिखाई राह
हेमलता ने इस योजना को अपने सपनों की उड़ान का जरिया बनाया। वह अपने पिता के साथ जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) जगदलपुर पहुंचीं। वहां अधिकारियों ने उन्हें योजना की विस्तृत जानकारी दी और किराना दुकान शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका घर मुख्य मार्ग पर होना इस व्यवसाय के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट था।
दिसंबर 2022 में पड़ी नींव
हेमलता ने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेते हुए ऋण के लिए आवेदन किया। दिसंबर 2022 में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की माड़पाल शाखा से उन्हें 2 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें शासन की ओर से 50 हजार रुपये का अनुदान (सब्सिडी) भी शामिल था।
इस राशि से उन्होंने अपने घर के सामने ही "मेसर्स कश्यप किराना स्टोर्स" की शुरुआत कर दी।
आज रोजाना 700 रुपये तक की कमाई
आज हेमलता की मेहनत रंग ला चुकी है। उनकी दुकान पर रोजाना अच्छी खासी बिक्री होती है, जिससे उन्हें प्रतिदिन 500 से 700 रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है।
कर्ज चुकाया: महज तीन साल के भीतर ही हेमलता ने अपना पूरा ऋण चुका दिया है।
टर्नओवर: अब उनका वार्षिक कारोबार (टर्नओवर) 2 से 3 लाख रुपये के बीच पहुंच गया है।
हेमलता बोलीं- योजना ने बदली जिंदगी
अपनी सफलता पर हेमलता बेहद खुश और संतुष्ट हैं। वह आज अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा,
"मैं सिर्फ 12वीं पास हूं, लेकिन मेरे अंदर हमेशा से कुछ कर दिखाने की चाह थी। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना मेरे लिए वरदान साबित हुई। आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और गांव के लोगों को भी सुविधा मिल रही है।"
संदेश: योजनाओं का सही क्रियान्वयन ही सफलता की कुंजी
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मार्गदर्शन में शुरू हुआ हेमलता का यह छोटा सा प्रयास आज एक सशक्त स्वरोजगार मॉडल बन चुका है। यह कहानी यह संदेश देती है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए, तो बस्तर जैसे दूरस्थ इलाके में भी खुशहाली के नए द्वार खोले जा सकते हैं।
