जगदलपुर: प्रतिपक्ष नेता ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप, कहा- "16 मतदाताओं के लिए अलग बूथ बनाना कहाँ तक तर्कसंगत?"
SIR प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां, मतदाता सूची प्रकाशन में पारदर्शिता का अभाव, दावा-आपत्ति प्रक्रिया अस्त-व्यस्त: राजेश चौधरी
जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष तथा कांग्रेस नेता राजेश चौधरी ने भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता संदिग्ध है और हाल ही में हुई विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं।
चौधरी ने कहा कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता चुनाव आयोग के कामकाज को सरकार का काम बता रहे हैं और आयोग पर लगे आरोपों का जवाब दे रहे हैं, उससे स्पष्ट होता है कि आयोग स्वतंत्र रूप से काम करने में अक्षम है।
माता संतोषी वार्ड में बूथों का अतार्किक बंटवारा: बड़ा विवाद
चौधरी ने एक ठोस उदाहरण देते हुए माता संतोषी वार्ड की स्थिति का खुलासा किया। उनके अनुसार:
SIR से पहले वार्ड में कुल मतदाता 2789 थे।
SIR प्रक्रिया (4 नवंबर से 4 दिसंबर) के बाद, मृत, स्थानांतरित आदि मतदाताओं को हटाकर 23 दिसंबर 2025 को प्रकाशित नई सूची में मतदाता संख्या घटकर 2249 रह गई।
चुनाव आयोग का अपना नियम है कि प्रति बूथ 800-900 मतदाता हों। इस हिसाब से 2249 मतदाताओं के लिए 3 बूथ पर्याप्त थे, जहां प्रति बूथ करीब 750 मतदाता आते।
लेकिन आयोग ने इस वार्ड में 4 बूथ बनाए, जिनकी संरचना हैरान करने वाली है:
बूथ क्रमांक 181: 786 मतदाता
बूथ क्रमांक 182: 977 मतदाता
बूथ क्रमांक 183: मात्र 16 मतदाता
बूथ क्रमांक 184: 470 मतदाता
"16 मतदाताओं के लिए अलग बूथ क्यों?"
राजेश चौधरी ने सीधा सवाल खड़ा किया: "मात्र 16 मतदाताओं के लिए नया बूथ (क्रमांक 183) बनाना कहाँ तक उचित है?" उन्होंने बताया कि ये 16 मतदाता पास के बूथ क्रमांक 184 की मस्जिद गली अनुभाग के हैं। इन्हें बूथ 184 में ही शामिल कर एक बूथ (183) को खत्म किया जा सकता था।
उन्होंने कहा, "जब एक वार्ड स्तर पर चुनाव आयोग की कार्यशैली इतनी त्रुटिपूर्ण है, तो पूरे प्रदेश और देश में किस स्तर की गड़बड़ियाँ होंगी? इसलिए राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोप गलत नहीं हैं।"
SIR प्रक्रिया में अन्य समस्याएं
नेता प्रतिपक्ष ने SIR प्रक्रिया से जुड़ी अन्य समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया:
दावा-आपत्ति की मुनादी नहीं: आयोग द्वारा दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि की उचित मुनादी नहीं की गई, जिससे लोगों को जानकारी नहीं मिल पा रही।
सूची उपलब्ध नहीं: मतदाता सूची प्रकाशन के बाद भी आम जनता के अवलोकन के लिए सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है।
पार्षदों को सूची नहीं: संबंधित पार्षदों को भी मतदाता सूची की प्रति नहीं दी गई, जिससे वे अपने क्षेत्र के मतदाताओं की मदद नहीं कर पा रहे।
शहरी मतदाता परेशान: SIR के दौरान शहरी मतदाताओं को दस्तावेज जमा कराने में बहुत परेशानी हुई। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में यह प्रक्रिया सही ढंग से हो पाना मुश्किल लगता है।
चौधरी ने निष्कर्ष में कहा कि इन सभी मुद्दों से चुनाव आयोग की पारदर्शिता और कुशलता पर प्रश्नचिह्न लगता है और मांग की कि आयोग तुरंत इन अनियमितताओं की जांच करे तथा मतदाता सूची को सही व सुलभ बनाए।
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