कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर का किया भ्रमण, किसानों को दिया व्यापक मार्गदर्शन
रायपुर/बस्तर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बस्तर का एक दिवसीय भ्रमण किया। इस दौरान आयोजित किसान संगोष्ठी में उन्होंने बस्तर अंचल के किसानों का विस्तृत मार्गदर्शन किया और क्षेत्र की कृषि संभावनाओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बस्तर के सुगंधित धान को जीआई टैग दिलाने पर जोर
किसान संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. चंदेल ने कहा कि बस्तर की स्थानीय सुगंधित धान की किस्में अत्यधिक लोकप्रिय हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन किस्मों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के माध्यम से एक विशेष पहचान दिलाई जानी चाहिए, जिससे किसानों को इन उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और बस्तर के धान की एक अलग पहचान बने।
काजू और गुलाब की खेती को बताया बेहतर विकल्प
डॉ. चंदेल ने बस्तर क्षेत्र में काजू की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। साथ ही, उद्यानिकी फसलों के तहत गुलाब की खेती को भी यहाँ के लिए एक लाभकारी विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि इन फसलों से किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है।
लघु धान्य फसलों के प्रसंस्करण पर ज़ोर
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाएँ, डॉ. एस. एस. टूटेजा ने लघु धान्य फसलों के क्षेत्र विस्तार और उनके प्रसंस्करण (Processing) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन से किसानों की आय में इजाफा होगा।
50 किसानों को वितरित की गई आदान सामग्री
कार्यक्रम के दौरान कुलपति द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत 50 हितग्राही किसानों को आदान सामग्री का वितरण किया गया। वितरित सामग्री में शामिल थी:
प्रक्षेत्र परीक्षण एवं प्राकृतिक खेती के तहत चना बीज
स्व सहायता समूह की महिलाओं को प्राकृतिक खेती के लिए प्लास्टिक ड्रम
द्वि-फसली विकास के लिए गेहूं का बीज
जन-जातीय उपयोजना के अंतर्गत बटेर एवं मछली आहार
वैज्ञानिकों और किसानों की रही मौजूदगी
इस कार्यक्रम में शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय, जगदलपुर के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम, केवीके बस्तर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संतोष नाग, डॉ. अश्विन ठाकुर, धर्मपाल केरकेट्टा, डॉ. राहुल साहू, दुष्यंत पांडे, श्वेता मंडल, इंजी. कमल ध्रुव, दिनेश ध्रुव सहित केंद्र के सभी वैज्ञानिक, कर्मचारी और जिले भर के 55 से अधिक किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. संतोष नाग के स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ, जिन्होंने केंद्र की गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
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