सांसद महेश कश्यप ने "शौर्यम् गुरुकुलम्" कार्यक्रम में की बड़ी घोषणा, "वैदिक खेल गतिविधि केंद्र" के लिए जारी किए २० लाख रुपये
जगदलपुर/बस्तर। बस्तर के शैक्षिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक पल देखने को मिला। संस्कार द गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, चिड़ईपदर में आयोजित भव्य सांस्कृतिक एवं शौर्य समारोह "शौर्यम् गुरुकुलम्" के मंच से बस्तर लोकसभा के सांसद महेश कश्यप ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सांसद निधि (MPLADS) से २० लाख रुपये की राशि विद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक 'वैदिक खेल गतिविधि केंद्र' की स्थापना के लिए प्रदान की जाएगी। यह केंद्र बस्तर क्षेत्र में अपनी तरह का पहला और अनूठा केंद्र होगा।संस्कार, शिक्षा और शौर्य का अद्वितीय संयोजन
"शौर्यम् गुरुकुलम्" कार्यक्रम कोई सामान्य सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, भारतीय शौर्य परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का जीवंत उदाहरण था। इस कार्यक्रम ने साबित किया कि कैसे शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की भावना को पोषित किया जा सकता है।
कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक शंखनाद और वैदिक मंगलाचरण के साथ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण में एक दिव्य और ओजस्वी माहौल बना दिया। अतिथि देवो भवः की परंपरा का निर्वाह करते हुए सभी गणमान्य अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया।
गणमान्य अतिथियों की शिरकत
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय सांसद महेश कश्यप जी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में संजय पाण्डेय जी (महापौर, जगदलपुर नगर निगम), अरुण सिन्हा जी (सहायक थाना प्रभारी, बस्तर थाना) और संग्राम सिंह राणा जी (पार्षद, नगर निगम) शामिल रहे। संस्कार समूह के अध्यक्ष रतन लाल जैन, निदेशक अमित कुमार जैन व श्रीमती नूतन जैन सहित संस्था के समस्त प्रबंधन ने अतिथियों का स्वागत किया।
विद्यार्थियों ने दिखाया असाधारण प्रदर्शन और अनुशासन
कार्यक्रम का केंद्र विद्यालय के छात्र-छात्राएं रहे, जिन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा से सबका मन मोह लिया। राष्ट्र आराधना गीत की सामूहिक प्रस्तुति ने राष्ट्रभक्ति की लहर दौड़ा दी। इसके बाद गणेश वंदना नृत्य, डम्बल मास पीटी, सूर्य-चंद्र नमस्कार, दंड-बैठक और शिव स्तुति योग पिरामिड जैसे कार्यक्रमों ने शारीरिक दक्षता, मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक शांति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
पारंपरिक युद्ध कलाओं का शानदार प्रदर्शन
कार्यक्रम का सबसे रोमांचकारी पल था भारतीय पारंपरिक युद्ध कलाओं का प्रदर्शन। विद्यार्थियों ने राइफल शूटिंग डेमोंस्ट्रेशन से एकाग्रता का परिचय दिया तो लेझिम, लाठी-काठी द्वंद्व, भाला युद्ध, तलवारबाज़ी, अग्नि लाठी और गतका के माध्यम से शौर्य की अद्भुत छटा बिखेरी। महाभारत नृत्य नाटिका ने नैतिक मूल्यों का संदेश दिया और भारत की प्राचीनतम युद्ध कला 'कलारीपयट्टू' के मंचन ने दर्शकों को हैरान कर दिया।
सांसद जी का ऐतिहासिक संबोधन और घोषणा
मुख्य अतिथि सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा, "आज का यह आयोजन प्रमाण है कि जब शिक्षा अपनी सनातन जड़ों से जुड़ती है, तो संस्कारवान, अनुशासित और शौर्यवान युवा पीढ़ी का निर्माण होता है। यहाँ बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का सार दिया जा रहा है।"
उन्होंने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐतिहासिक घोषणा की: "मैं घोषणा करता हूँ कि मेरी सांसद निधि से बीस लाख रुपये की राशि इस विद्यालय में एक 'वैदिक खेल गतिविधि केंद्र' बनाने के लिए प्रदान की जाएगी। यह केंद्र योग, दंड-बैठक, कलारीपयट्टू, तलवारबाज़ी जैसी हमारी पारंपरिक विद्याओं को आगे बढ़ाएगा और पूरे बस्तर अंचल के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।" इस घोषणा पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन के साथ हुआ। 'शौर्यम् गुरुकुलम्' के इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सही शिक्षा और संस्कार ही राष्ट्र के भविष्य को मजबूत कर सकते हैं। सांसद महेश कश्यप के इस निवेश से बस्तर में शिक्षा के एक नए युग की शुरुआत होगी, जहाँ आधुनिकता और परंपरा का समन्वय होगा।

