केंद्रीय बजट पर BJP नेताओं को घेरा नेता प्रतिपक्ष ने, नगर निगम ने टैक्स बढ़ने का दिया यह कारण
जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर की राजनीति में एक ओर जहां केंद्रीय बजट को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने नागरिकों में बढ़े हुए संपत्ति कर को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्टीकरण दिया है। नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने केंद्र सरकार के बजट और स्थानीय भाजपा नेताओं के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
केंद्रीय बजट पर निशाना: 'जेब में डाका'
नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026-27 के बजट को "जनता के जेब में डाका डालने वाला" करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय भाजपा नेता इस बजट का "बखान" करके जनता को "दिग्भ्रमित" कर रहे हैं, जबकि इसमें छत्तीसगढ़, बस्तर अंचल, युवाओं, बेरोजगारों, वृद्धों और व्यापारियों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।
चौधरी ने स्थानीय विधायक और महापौर को चुनौती देते हुए कहा, "जिस तरह से आप बजट का बखान कर रहे हैं, उसी तरह यह भी बताइए कि क्यों 70-80 साल के बुजुर्गों को दो महीने का राशन नहीं मिल रहा? क्यों जीवित लोगों के राशन कार्ड बंद हो रहे हैं? फिंगरप्रिंट न होने से क्यों महतारी वंदन योजना और पेंशन की राशि नहीं मिल रही?"
उन्होंने कहा कि इन मूलभूत समस्याओं की ओर न तो महापौर का ध्यान है और न ही विधायक का। चौधरी ने मांग की कि या तो तत्काल इन समस्याओं का समाधान करें।
नगर निगम का स्पष्टीकरण: 'टैक्स दरें नहीं बढ़ीं, री-असेसमेंट है कारण'
इस बीच, शहर के कई हिस्सों में संपत्ति कर (हाउस टैक्स) में हुई वृद्धि को लेकर नागरिकों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में नगर निगम ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि टैक्स की दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है। हाल ही में कुछ संपत्तियों पर टैक्स राशि अधिक आने का एकमात्र कारण 14 वर्षों बाद किया गया संपत्तियों का री-असेसमेंट (पुनर्मूल्यांकन) है।
री-असेसमेंट के कारण टैक्स बढ़ने की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:
संपत्ति में कोई नया निर्माण हुआ हो।
संपत्ति का उपयोग रिहायशी (आवासीय) से व्यावसायिक (कमर्शियल) में बदला गया हो।
पहले दर्ज क्षेत्रफल की तुलना में वास्तविक निर्मित क्षेत्र अधिक पाया गया हो।
राजस्व सभापति संग्राम सिंह राणा ने बताया कि हाउस टैक्स नगर निगम के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे सड़क रखरखाव, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं का खर्च चलता है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, "यदि किसी भी नागरिक को लगता है कि उनकी संपत्ति का पुनर्मूल्यांकन गलत हुआ है, तो वे नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हम पूरी निष्पक्षता से पुनः जांच कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
इन दोनों घटनाक्रमों ने शहर में स्थानीय प्रशासन और विकास के मुद्दों पर चर्चा को तेज कर दिया है। अब देखना है कि बजट को लेकर उठाए गए आरोपों का भाजपा नेता क्या जवाब देते हैं और टैक्स संबंधी स्पष्टीकरण से नागरिकों की चिंताएं कितनी दूर हो पाती हैं।

