AMNS Advertisement

बस्तर की बेटियों ने राष्ट्रीय पेंचक सिलाट में जीते 4 पदक

बस्तर की बेटियों ने राष्ट्रीय पेंचक सिलाट चैंपियनशिप में मार्शल आर्ट का परचम लहराया, 4 पदक जीतकर बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

बस्तर की पेंचक सिलाट चैंपियन बेटियां - साक्षी सिंह चौहान, यशस्वी सिंह, के. ज्योति और ममता पांडेय देहरादून राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपने पदक और प्रमाण पत्रों के साथ खुशी से मुस्कुराते हुए।
जगदलपुर। देहरादून के परेड ग्राउंड में 28 से 31 जनवरी तक आयोजित तीसरी अखिल भारतीय पेंचक सिलाट चैंपियनशिप 2026-27 में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल चार पदक अपने नाम किए। इन युवा खिलाड़ियों ने न केवल जिले और राज्य का गौरव बढ़ाया, बल्कि यह साबित कर दिया कि बस्तर की प्रतिभाएं राष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमा रही हैं।

सब-जूनियर वर्ग में दोहरी स्वर्णिम सफलता

सब-जूनियर बालिका वर्ग में बस्तर की खिलाड़ियों ने दबदबा कायम रखा। 66 किग्रा भार वर्ग में साक्षी सिंह चौहान और 72 किग्रा भार वर्ग में यशस्वी सिंह ने शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। खास बात यह है कि ये दोनों खिलाड़ी लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुकी हैं।

सीनियर वर्ग में भी रही धमाकेदार उपस्थिति

सीनियर महिला वर्ग में भी बस्तर की बेटियों ने कमाल दिखाया। 70 किग्रा भार वर्ग में के. ज्योति ने रजत पदक जीता, जबकि ओपन श्रेणी में ममता पांडेय ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अलावा जूनियर वर्ग में ग्रेसी नायर का प्रदर्शन भी उम्मीदों पर खरा उतरा और उन्होंने भविष्य के लिए एक मजबूत दावेदारी पेश की।

फेडरेशन और अकादमी ने जताया गर्व

इस उपलब्धि पर इंडियन पेंचक सिलाट फेडरेशन के सीईओ मोहम्मद इक़बाल, अध्यक्ष किशोर यावले और सचिव तारीख जरगर ने सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

बस्तर मार्शल आर्ट अकादमी के अध्यक्ष विजयपाल सिंह, सचिव भगत सोनी, संरक्षक गौतम कुंडू और पूरे अकादमी परिवार ने इस ऐतिहासिक सफलता पर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उनका मानना है कि यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत प्रेरणा स्रोत साबित होगी।

उत्तराखंड की खेल मंत्री रहीं मुख्य अतिथि

इस चार दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता के समापन समारोह की मुख्य अतिथि उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या रहीं। उन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान कर उनके हौसले को और बुलंद किया।

बस्तर की इन मार्शल आर्ट खिलाड़ियों की यह सामूहिक सफलता न केवल क्षेत्र के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों की प्रतिभाएं देश के सर्वोच्च मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में सक्षम हैं।

basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

Post a Comment

Previous Post Next Post