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OBC को 27% आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग: बस्तर में सर्व पिछड़ा वर्ग समाज का ज्ञापन, सांसद कार्यालय के सामने प्रदर्शन

OBC को 27% आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग: बस्तर में सर्व पिछड़ा वर्ग समाज का ज्ञापन, सांसद कार्यालय के सामने प्रदर्शन

पेसा कानून में OBC समाज को शामिल करने और पंचायत चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व की उठाई मांग

जगदलपुर, बस्तर | 18 अक्टूबर 2026:

छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज बस्तर संभाग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समाज की विभिन्न न्याय संगत मांगों के समाधान हेतु सांसद कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना एवं प्रदर्शन किया गया। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए संबंधित अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। समाज का कहना है कि राज्य में 52% से अधिक आबादी होने के बावजूद उन्हें संवैधानिक अधिकारों और उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रखा जा रहा है।

सांसद कार्यालय के सामने OBC आरक्षण की मांग को लेकर नारेबाजी करते छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के पदाधिकारी व सदस्य
सांसद कार्यालय के सामने नारेबाजी करते छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के पदाधिकारी व सदस्य। — फोटो: सोशल मीडिया

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समाज को क्यों लग रहा है ठगा हुआ?

छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के संभागीय अध्यक्ष तरुण धाकड़ ने बताया कि महोदय जी छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग समाज की आबादी लगभग 52% से अधिक होने के उपरांत भी समाज संवैधानिक अधिकारों और उचित प्रतिनिधित्व से वंचित है। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व प्रभावित होने तथा आगामी राष्ट्रीय जनगणना में स्पष्ट प्रावधान न होने से समाज में अत्यधिक आक्रोश एवं चिंता व्याप्त है।

OBC समाज की प्रमुख मांगें

  • 27 प्रतिशत आरक्षण: केंद्र और अन्य राज्यों की भांति छत्तीसगढ़ में भी OBC समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने हेतु आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। (आरक्षण व्यवस्था को नौवीं अनुसूची में शामिल करवाने की आवश्यकता है)
  • जातिगत जनगणना एवं पृथक कॉलम: राष्ट्रीय जनगणना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज की भांति पिछड़ा वर्ग समाज के लिए भी अलग से कॉलम निर्धारित किया जाकर जातिगत जनगणना की जाए।
  • संवैधानिक एवं प्रशासनिक संरक्षण: पांचवी अनुसूची के तहत समस्त मूलनिवासी भाइयों को हर तरह का लाभ दिया जाए। बस्तर संभाग में निवासरत OBC समाज भी यहां का मूल निवासी है, हमारी संस्कृति और परंपराएं आदिवासी भाइयों से मिलती-जुलती हैं। हमें भी स्वशासन का अधिकार मिलना चाहिए, एतद् पेसा (PESA) कानून में शामिल जातियों की श्रेणी में हमारे समुदाय को भी शामिल किया जाए।

मांग की गई है कि सर्व पिछड़ा वर्ग समाज की इन अति महत्वपूर्ण और न्याय संगत मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए शीघ्र उचित मंच पर मांगों को पुरजोर ढंग से रखते हुए समाधान करेंगे।

— तरुण सिंह (संभागीय अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, बस्तर संभाग)

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basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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