बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने सपरिवार किए हिंगलाजिन माता के दर्शन, मंदिर समिति द्वारा सवा किलो चांदी का छत्र माता को समर्पित
दशहरे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में माता के प्रतीक स्वरूप निकाले जाने वाले छत्र को वर्षों बाद मिला नया स्वरूप
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| बेड़ागांव स्थित प्राचीन हिंगलाजिन माता मूल मंदिर में सपरिवार दर्शन-पूजन करने पहुंचे एसपी शलभ सिन्हा। — फोटो: स्थानीय स्रोत |
जगदलपुर | 19 अक्टूबर 2026: बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने आज सपरिवार रियासत कालीन प्राचीन हिंगलाजिन माता मंदिर, बेड़ागांव, सोनपुर पंचायत में पहुंचकर माता के पावन दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली के लिए माता से प्रार्थना की।
मंदिर अध्यक्ष ने किया रजत छत्र समर्पित
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| जगदलपुर: हिंगलाजिन माता मूल मंदिर में माता को समर्पित किया गया सवा किलो चांदी से निर्मित भव्य रजत छत्र। — फोटो: स्थानीय स्रोत |
मंदिर की धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़े एक विशेष आयोजन के अंतर्गत दशहरे सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में माता के प्रतीक स्वरूप निकाले जाने वाले पवित्र छत्र को नया स्वरूप प्रदान किया गया। अनेक वर्षों के बाद सवा किलो चांदी से निर्मित भव्य रजत छत्र को मंदिर के अध्यक्ष एवं संरक्षक अजय सिंह बैस द्वारा स्वयं माता को समर्पित किया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सपरिवार मंदिर पहुंचे और उन्होंने भी इस पावन अवसर पर माता के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए। इस रजत छत्र का निर्माण शहर के एक प्रतिष्ठित ज्वेलर्स द्वारा किया गया है।
बाजे-गाजे के साथ हुआ भव्य स्वागत
छत्र के मंदिर पहुंचने पर ग्रामीणों, पुजारियों एवं सेवादारों ने बाजे-गाजे और हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया तथा धार्मिक उत्साह के बीच मंदिर तक ले जाया गया। प्राचीन हिंगलाजिन माता मूल मंदिर बस्तर की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां माता के प्रति क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। दशहरे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में माता के प्रतीक स्वरूप छत्र की परंपरा का विशेष महत्व है। रजत छत्र का समर्पण इस प्राचीन परंपरा को संरक्षित करने और मंदिर की धार्मिक गरिमा को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक बना आयोजन
इस अवसर पर ग्रामीणों, पुजारियों एवं सेवादारों में विशेष उत्साह देखने को मिला। आयोजन ने मंदिर की परंपराओं, सामूहिक श्रद्धा और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों की प्रतिबद्धता को एक बार फिर अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर डी. पी. देवांगन, भरत देवांगन, लखन कश्यप, चंद्रसेना दीवान, गजाधर पुजारी, चैन पुजारी, रामनाथ कश्यप, डोलहा, सेवादार, मांझी मुखिया चालकी, ग्रामीण महिलाएं एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

