जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में 6 करोड़ की लागत से शुरू हुआ आधुनिक लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर, बस्तर को मिली जीवन रक्षा की मजबूत सौगात
![]() |
| जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में 6 करोड़ की लागत से बने लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर में आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था। |
12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत मिली स्वीकृति
भारत सरकार की 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत देश भर में 85 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का प्रावधान किया गया था। इसी अनुक्रम में वर्ष 2020-21 में छत्तीसगढ़ राज्य के तीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों — रायगढ़, अंबिकापुर एवं जगदलपुर — के लिए ट्रॉमा सेंटर स्वीकृत किए गए थे। इसी कड़ी में जगदलपुर में यह अत्याधुनिक सुविधा अब धरातल पर उतर चुकी है।
6 करोड़ रुपए की लागत, 20 बिस्तरों की व्यवस्था
इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई के निर्माण एवं सुचारू संचालन के लिए कुल लगभग 6 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया है, जिसमें —
| मद | राशि |
|---|---|
| आधारभूत अधोसंरचना निर्माण | 1.50 करोड़ रुपए |
| जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरण | 4.43 करोड़ रुपए |
आपातकालीन एवं गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को त्वरित व समुचित उपचार देने के उद्देश्य से इस केंद्र में 20 बिस्तरों की आधुनिक व्यवस्था की गई है। साथ ही केंद्र के निरंतर संचालन के लिए 60 नए पदों की स्वीकृति भी दी गई है, जिससे चिकित्सा व सहायक सेवाओं को जमीनी मजबूती मिलेगी।
गोल्डन ऑवर का रखा गया विशेष ध्यान
मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. प्रदीप बेक ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में दुर्घटना के तत्काल बाद का पहला घंटा यानी गोल्डन ऑवर जीवन रक्षा के लिए सर्वाधिक संवेदनशील माना जाता है। इसी प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए यह ट्रॉमा यूनिट आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और गहन चिकित्सा इकाई (ICU) से सुसज्जित है।
यहाँ एक ही छत के नीचे न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थीसिया, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे, ताकि सड़क हादसों व अन्य गंभीर आपात स्थितियों में बिना समय गंवाए जटिल सर्जरी व सघन उपचार तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।
बस्तर के लिए बना भरोसे का केंद्र
यह सुविधा बस्तर क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन रक्षा का एक मजबूत भरोसा बनकर उभरी है। इससे गंभीर मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की मजबूरी से बड़ी राहत मिलेगी, जिससे कीमती समय और जान दोनों की रक्षा संभव हो सकेगी। क्षेत्रवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बस्तर के स्वास्थ्य ढांचे में नए युग की शुरुआत बताया है।
