🏚️ पुनर्वास के नाम पर 34.50 लाख की वसूली का आरोप
23 विस्थापित परिवारों से डेढ़-डेढ़ लाख लेने का दावा, पंचायत के नाम 1 लाख और वन समिति के नाम 50 हजार
जमीन अधिग्रहित, मुआवजा मिला लेकिन पुनर्वास की जमीन अब भी विवादों में
भांसी, 13 सितंबर 2026 | ब्रह्मा सोनानी
भांसी कलारपारा के प्रभावित विस्थापित परिवार — डिपॉजिट-4 खदान के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद पुनर्वास के संकट से जूझते हुए
बैलाडीला की पहाड़ियों में प्रस्तावित डिपॉजिट-4 खदान के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद भांसी के कलारपारा के 23 परिवारों के सामने पुनर्वास का संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में अब पुनर्वास की जमीन और NOC दिलाने के नाम पर कथित रूप से 34 लाख 50 हजार रुपये लिए जाने का आरोप सामने आया है।
ग्रामीणों का दावा है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार से कुल 1.50 लाख रुपये लिए गए। इनमें 1 लाख रुपये ग्राम पंचायत के नाम पर और 50 हजार रुपये वन समिति के नाम पर लिए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है।
⚠️ मामले की मुख्य बातें
- 💰 कुल आरोपित वसूली: 34.50 लाख रुपये
- 👥 प्रभावित परिवार: 23 (भांसी कलारपारा)
- 💵 प्रति परिवार: 1.50 लाख (1 लाख पंचायत + 50 हजार वन समिति)
- ⛏️ परियोजना: डिपॉजिट-4 खदान, बैलाडीला (NCL — NMDC व CMDC का संयुक्त उपक्रम)
- 🏛️ कलेक्टर का बयान: जांच होगी, दोषी मिले तो कार्रवाई
📍 जमीन गई, मुआवजा मिला; लेकिन बसने की जगह अब भी तय नहीं
डिपॉजिट-4 खदान से नगरनार स्टील प्लांट के लिए लौह अयस्क उत्खनन प्रस्तावित है। इसके लिए एनसीएल (NCL), जो एनएमडीसी (NMDC) और सीएमडीसी (CMDC) का संयुक्त उपक्रम है, द्वारा भांसी और पोरो कमेली ग्राम पंचायत क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की गई। इसी प्रक्रिया में भांसी कलारपारा के 23 परिवारों की जमीन भी अधिग्रहित की गई है।
जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि जमा कराई जा चुकी है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी सहमति और अधिकारों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि कई मामलों में दबाव और कथित रूप से छलपूर्वक जमीन छोड़ने की स्थिति बनाई गई।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि उनकी जमीन, खेत, पेड़-पौधों और वन संपदा का मौके पर वास्तविक और विस्तृत सर्वे नहीं किया गया। उनके अनुसार, मौके पर मूल्यांकन करने के बजाय कार्यालय स्तर पर आकलन कर दिया गया।
🌳 जिस जमीन पर बसना है, उसी पर वन विभाग का दावा
प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता पुनर्वास को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे की राशि तो खातों में पहुंच गई, लेकिन परिवारों के रहने के लिए अब तक ऐसी जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है, जहां वे घर बना सकें और अपने पशुधन को भी रख सकें।
ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन ने जिस जमीन को पुनर्वास के लिए चिन्हित किया है, उस पर वन विभाग अपना अधिकार जता रहा है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने यह सवाल है कि आखिर वे अपने नए घर कहां बनाएंगे?
🚫 NOC के नाम पर पैसे लेने का आरोप, गांव में बढ़ा आक्रोश
मामले का सबसे गंभीर पहलू पुनर्वास स्थल पर घर बनाने के लिए NOC दिलाने के नाम पर कथित वसूली का है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत से जुड़े लोगों ने पंचायत के नाम पर प्रति परिवार 1 लाख रुपये और वन समिति के नाम पर 50 हजार रुपये लिए।
इस हिसाब से 23 परिवारों से कथित तौर पर 34.50 लाख रुपये लिए जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने यह राशि इस उम्मीद में दी कि उन्हें पुनर्वास स्थल पर घर बनाने के लिए जरूरी NOC और जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी।
अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब पुनर्वास स्थल की वैधानिक स्थिति ही स्पष्ट नहीं है, तो उनसे NOC के नाम पर राशि किस आधार पर ली गई?
📜 पट्टा किस आधार पर मिलेगा, यह भी स्पष्ट नहीं
प्रभावित परिवारों के मुताबिक प्रशासन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुनर्वास के तहत उन्हें किस प्रकार का पट्टा या भूमि अधिकार दिया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बताया जा रहा है कि सामूहिक पुनर्वास के नाम पर पट्टा नहीं बनेगा, बल्कि किसी अन्य व्यवस्था के तहत भूमि अधिकार दिया जाएगा।
इस अस्पष्टता ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि जब तक वैकल्पिक जमीन, मकान और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं होतीं, तब तक मौजूदा जमीन खाली करवाना उन्हें बेघर करने जैसा होगा।
🔄 दोबारा सर्वे और व्यवस्थित पुनर्वास की मांग
कलारपारा के प्रभावित परिवारों ने जमीन, खेत, पेड़-पौधों और अन्य वन संपदा का मौके पर दोबारा निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा वास्तविक स्थिति के आधार पर तय होना चाहिए।
इसके साथ ही प्रभावित परिवारों ने ऐसी पुनर्वास भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है, जहां वे अपने परिवार के साथ घर बना सकें और पशुधन भी रख सकें। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के लिए जमीन देने में उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन जमीन लेने से पहले उनके अधिकार, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है — जमीन चली गई, पुनर्वास की जमीन विवादों में है और NOC के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप है, तो 23 परिवार आखिर जाएंगे कहां?
🎤 कलेक्टर ने कहा — जांच होगी
"पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। ग्राम पंचायत और वन समिति का पैसा लेना गलत है। जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।"
— देवेश ध्रुव, कलेक्टर, दंतेवाड़ा
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