CG शिक्षक बहस: 8 साल बनाम पुराने नेता, किसने दिलाए परिणाम?

छत्तीसगढ़ में शिक्षक संगठनों पर बहस: 8 साल बनाम पुराना दौर — किसके नेतृत्व में मिले परिणाम?

छत्तीसगढ़ शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू का फाइल फोटो
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू का फाइल फोटो। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 1.80 लाख शिक्षकों के बीच इन दिनों शिक्षक संगठनों और उनके नेतृत्व को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। प्रदेश के एक शिक्षक संगठन से जुड़े सूत्रों ने एक लिखित संदेश जारी कर पिछले 8 वर्षों में शिक्षकों की मांगों को लेकर सवाल उठाए हैं।

इस संदेश में वर्तमान फेडरेशन नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए पुराने शिक्षक नेताओं के कार्यकाल को अधिक सफल बताया गया है। हालांकि, शिक्षक महासंघों का कहना है कि शिक्षक हितों के लिए सभी संगठन मिलकर काम कर रहे हैं और किसी भी नेतृत्व की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।


🔍 क्या कहता है सूत्रों का बयान?

सूत्रों के अनुसार, पिछले 8 सालों (2018-2026) में शिक्षकों से जुड़ी कोई भी बड़ी मांग पूरी नहीं हो सकी है। बार-बार आंदोलनों के नाम पर शिक्षकों को रायपुर बुलाया गया, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। साथ ही, आंदोलनों के नाम पर बार-बार चंदा वसूली के भी आरोप लगाए गए हैं।

बयान में यह भी कहा गया है कि फेडरेशन के संस्थापक सदस्यों को धीरे-धीरे बाहर कर दिया गया और संगठन को एक व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया गया। जिसके चलते सही मायने में शिक्षकों की आवाज नहीं उठ पाई।


📊 तुलनात्मक विश्लेषण: पुराना दौर बनाम वर्तमान फेडरेशन

बयान में शिक्षकों से तुलनात्मक अध्ययन करने की भी अपील की गई है:

समय अवधिप्रमुख उपलब्धियाँ
2011-2017 (पुराना नेतृत्व)• 2011 में एक साथ 11 आदेश जारी
• 2013 में छठवां वेतनमान प्राप्त
• 2017 में ऐतिहासिक संविलियन (मर्जर) हासिल
2018-2026 (वर्तमान फेडरेशन)• कई आंदोलन हुए, लेकिन कोई बड़ी सफलता नहीं
• वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन, प्रोन्नति जैसी मांगें अटकी
• TET बाध्यता और सेवा गणना पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं

सूत्रों के अनुसार, 1995 में 500 रुपए महीने से शुरू हुआ शिक्षकों का वेतन आज 30 हजार से 1 लाख रुपए तक पहुँच गया है — जिसका श्रेय पुराने शिक्षक नेताओं (संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, विकास राजपूत सहित) को दिया जाता है।


📢 उठाई गई प्रमुख माँगें

बयान में शिक्षकों की इन माँगों पर जोर दिया गया है:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली

  • प्रथम सेवा गणना (First Service Count)

  • वेतन विसंगति को दूर करना

  • प्रोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया शुरू करना

  • TET (टीईटी) की बाध्यता को समाप्त करना

साथ ही, शिक्षकों से अपील की गई है कि सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाकर संयुक्त रूप से आंदोलन किया जाए, ताकि माँगों को पूरा करवाया जा सके।


⚠️ शिक्षकों को सावधानी की सलाह

बयान के अनुसार, शिक्षकों को वर्तमान फेडरेशन नेतृत्व से सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि –

"पिछले 8 सालों में न तो कोई ठोस परिणाम मिला और न ही कोई बड़ी माँग पूरी हो सकी।"

हालाँकि, जानकारों का मानना है कि शिक्षकों के हित में सभी संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए और किसी भी तरह के आंतरिक विवाद से बचना चाहिए।


basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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