सड़क हादसे में मल्टीपल फ्रैक्चर का शिकार हुआ युवक, सीसीएसएच के डॉक्टरों ने एक साथ किए 4 बड़े ऑपरेशन
⚡ बस की चपेट में आने से टूट गए थे पैर, पसलियां, कंधा और जबड़ा, आयुष्मान भारत से हुआ मुफ्त इलाज
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| कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (सीसीएसएच), डिमरापाल जगदलपुर का बाहरी दृश्य। यहां सड़क हादसे में मल्टीपल फ्रैक्चर का शिकार हुए युवक का सफल ऑपरेशन किया गया। |
जानलेवा हादसे के बाद सीसीएसएच पहुंचा युवक
भेजापदर निवासी बालीभद्र बघेल अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से जगदलपुर से चोकावाड़ा जा रहा था। तभी विपरीत दिशा से आ रही तेज रफ्तार बस ने उन्हें चपेट में ले लिया। हादसे में बालीभद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके शरीर के दाहिने तरफ क्लेविकल फ्रैक्चर (कंधे की हड्डी टूटना), टिबिया-फिबुला (घुटने के नीचे की दोनों हड्डियों) में मल्टीपल फ्रैक्चर, मीडियल एंड पोस्टीरियर मैलीलस फ्रैक्चर, मैंडिबल फ्रैक्चर (जबड़ा टूटना) और चेस्ट इंजरी (सीने में चोट) थी।
डॉक्टरों ने एक साथ किए 4 बड़े ऑपरेशन
गंभीर हालत में उन्हें सीसीएसएच लाया गया, जहां ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पुष्पेंद्र सिंह राठौर और मैक्सो फेशियल सर्जन डॉ. शिवानी सारंगी ने संयुक्त रूप से उनका इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने एक ही सिटिंग में सभी ऑपरेशन करने का निर्णय लिया ताकि मरीज को बार-बार एनेस्थीसिया न देना पड़े।
डॉ. पुष्पेंद्र सिंह राठौर ने पैर, पसलियों और कंधे का ऑपरेशन किया, जिसमें ओरिफ विद मेंडिबल प्लेटिंग, सी-रिफ विद टिबिया एंड फिबुला नेलिंग, मीडियल मैलीलस स्क्रू फिक्सेशन, वुंड डी-ब्राइडमेंट एंड क्लेविकल प्लेटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। वहीं डॉ. शिवानी सारंगी ने जबड़े का ऑपरेशन किया, जिसमें उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन में तीन प्लेट डालकर चेहरे का एलाइनमेंट सुधारा।
आयुष्मान भारत से हुआ मुफ्त इलाज, मरीज को मिली छुट्टी
ऑपरेशन के बाद बालीभद्र का चेहरा पहले की तरह हो चुका है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं। अंतिम जांच के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बालीभद्र के पिता मिचन बघेल और भाई हरिचंद बघेल ने बताया कि पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ है। उन्होंने कहा, "अगर जगदलपुर में सीसीएसएच नहीं होता, तो हमारे बेटे को इतना अच्छा इलाज नहीं मिल पाता। आयुष्मान भारत योजना ने हमारी आर्थिक चिंता भी दूर कर दी।"
डॉक्टरों ने बताई सर्जरी की चुनौती
डॉ. पुष्पेंद्र सिंह राठौर ने कहा, "हमारा प्रयास था कि मरीज को बार-बार ऑपरेशन थियेटर न लाना पड़े, इसलिए हमने एक ही सिटिंग में सभी ऑपरेशन किए। यह चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी पूरी टीम ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया।"
डॉ. शिवानी सारंगी ने बताया, "जबड़े में फ्रैक्चर होने के कारण वह मुंह बंद नहीं कर पा रहा था। ऑपरेशन के बाद अब वह पूरी तरह ठीक है और उसका चेहरा भी पहले जैसा हो गया है।"
सीसीएसएच की इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बस्तर क्षेत्र में अब जटिल से जटिल ऑपरेशन संभव हैं।
