360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज का 619 वर्षों से चली आ रही रियासतकालीन परंपरा का निर्वहन: गोंचा महापर्व 2026 की भव्य तैयारियां
जगदलपुर, 15 जुलाई 2026 | 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज अपनी 619 वर्षों से समृद्ध रियासत कालीन परंपरा का अनवरत निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी भव्य गोंचा महापर्व का आयोजन कर रहा है। 29 जून देव स्नान पूर्णिमा से आरंभ हुआ यह पर्व 25 जुलाई देवशयनी एकादशी को संपन्न होगा। इस वार्षिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव के तहत बस्तर में भगवान श्री जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी की रथ यात्रा निकाली जाती है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।गोंचा महापर्व का शुभारंभ एवं पूजा विधान
29 जून को देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर चंदन यात्रा पूजा विधान के साथ गोंचा महापर्व का आगाज हुआ। इस दिन मंदिर परिसर में स्थापित शेड पर भगवान को स्नान कराया गया, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन लाभ प्रदान करना था। बड़ी संख्या में भक्तों ने इस पुण्य अवसर पर दर्शन किए। 15 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ जी के अनसर काल की समाप्ति के साथ नेत्रोत्सव पूजा विधान संपन्न हुआ।
भव्य रथ यात्रा एवं परिक्रमा
16 जुलाई को पारंपरिक बस्तर के ढोल-नृत्य और तुपकी की गर्जना के बीच श्रीगोंचा रथ यात्रा पूजा विधान संपन्न होगी। भगवान श्री जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के 22 विग्रहों को तीन रथों पर रथारूढ़ परिक्रमा करते हुए जनकपुरी गुंडिचा मंडप में विराजित किया जाएगा। यहां 9 दिनों तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
ज्ञातव्य है कि सन् 1408 में बस्तर के राजा महाराजा पुरुषोत्तम देव ने जगन्नाथपुरी की यात्रा की थी, जहां से वे 360 आरण्यक ब्राह्मण परिवारों को साथ लेकर लौटे थे। इसके बाद उन्होंने 16 पहियों वाला रथ और 'रथाधिपति' की उपाधि प्राप्त की। तब से यह परंपरा 617 वर्षों से निरंतर जारी है।
16 से 24 जुलाई तक विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
समाज द्वारा 16 से 24 जुलाई तक प्रत्येक दिवस विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है। रथ यात्रा के प्रारंभ में समाज एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नागरिकों के माध्यम से दुखी की सलामी की व्यवस्था की गई है। इस वर्ष गोंचा महापर्व के पहले दिन जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय अवकाश घोषित किए जाने पर बस्तर कलेक्टर का आभार व्यक्त किया गया है।
प्रतिदिन भजन संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
गोंचा महापर्व के दौरान प्रत्येक दिवस संध्या 7:30 बजे भगवान की महा आरती के उपरांत भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन के सांस्कृतिक मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भजन संध्या की प्रस्तुति देंगे।
विशेष आयोजन
19 जुलाई: अखंड रामायण पाठ का आयोजन
20 जुलाई (हेरा पंचमी): समाज के बुजुर्गों का सम्मान एवं तुपकी निर्माता ग्रामीणों का सम्मान। संध्या में लक्ष्मी जी की डोली नगर भ्रमण कर जनकपुरी पहुंचेगी, जहां लक्ष्मी-नारायण संवाद होगा।
21 जुलाई: भगवान श्री जगन्नाथ को 56 भोग का अर्पण
23 जुलाई: उपनयन संस्कार
24 जुलाई: बहुड़ा गोंचा पूजा विधान के साथ भगवान की वापसी एवं कपाट फेड़ा पूजा
नवीन आकर्षण एवं व्यवस्थाएं
इस वर्ष 13 वर्षों बाद झांकी स्थल को टेंपल कमिटी कोरापुट के पूर्व सचिव स्वर्गीय कृष्ण चंद्र पाणिग्रही के सहयोग से पुनः नवीन वेशभूषा एवं विद्युत व्यवस्था के साथ सुसज्जित किया गया है। नगर पालिक निगम जगदलपुर के सहयोग से गुंडिचा गुड़ी का निर्माण कराया जा रहा है, जहां दिव्यांग एवं वृद्धजन बैठकर गोंचा महापर्व का आनंद ले सकेंगे। पर्व के दौरान 12 दुकानें स्थापित की जा रही हैं, जहां पूजा सामग्री, धार्मिक वस्तुएं एवं भगवान को प्रिय भोग-प्रसाद उपलब्ध होंगे।
मुख्यमंत्री एवं जनप्रतिनिधियों का आमंत्रण
परंपरानुसार समाज के प्रतिनिधि मंडल द्वारा 11 जुलाई को बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री को गोंचा महापर्व में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रण दिया गया। मुख्यमंत्री ने विधानसभा के मानसून सत्र समाप्त होने के बाद किसी भी दिन शामिल होने का आश्वासन दिया है। अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों के भी पर्व में शामिल होने की संभावना है।
सात्विक भोग एवं अमनिया प्रसाद वितरण
शताब्दियों से चली आ रही रियासतकालीन परंपरा के अनुसार 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज की 14 क्षेत्रीय समितियों, 108 से अधिक ग्रामों में निवासरत समाज के परिवारों द्वारा 17 से 23 जुलाई तक प्रतिदिन भगवान को अमनिया (सात्विक शुद्ध) भोग अर्पित किया जाएगा, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को वितरण किया जाएगा।
25 जुलाई: देवशयनी एकादशी पर समापन
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ गोंचा महापर्व का पारायण आगामी वर्ष के लिए होगा। समाज ने सभी समाज, समुदाय एवं जनसमुदाय के लोगों को महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के दर्शन लाभ के लिए आमंत्रित किया है। बस्तर अंचल का दशहरा पर्व एवं गोंचा महापर्व अपनी समृद्ध, गौरवशाली एवं समृद्ध परंपराओं के लिए देश-विदेश तक विशिष्ट स्थान रखता है।
