कोकून उत्पादन में वृद्धि के लिए किसानों को दी नवीन तकनीकों की जानकारी: डुमरतरई में कार्यक्रम संपन्न
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| केंद्रीय रेशम बोर्ड बस्तर द्वारा डुमरतरई में आयोजित कृषक क्षेत्र दिवस कार्यक्रम में वैज्ञानिक किसानों को कोकून उत्पादन की नवीन तकनीकों की जानकारी देते हुए। |
वैज्ञानिकों ने दी नवीनतम तकनीकों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरविंद कुमार एस., वैज्ञानिक-बी ने कोकून उत्पादन में वृद्धि हेतु नवीन तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर किसान अपने रेशम उत्पादन को कई गुना बढ़ा सकते हैं। वहीं, डॉ. प्रवीण रेड्डी, वैज्ञानिक-बी, बस्तर ने ग्रेनेज गतिविधियों के प्रभावी प्रबंधन पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि किस प्रकार सही प्रबंधन से रेशम की गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों में सुधार संभव है।
किसानों को जीवन सुधा एवं एल.एस.एम. के उपयोग का प्रदर्शन
सुनील कुमार परिछा, वरिष्ठ तकनीकी सहायक ने किसानों को जीवन सुधा एवं एल.एस.एम. (लिक्विड सिल्क माइक्रोब) के उपयोग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी साधनों के नियमित उपयोग से कोकून की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है और उत्पादन लागत में भी कमी आती है। ताहिर सिद्दीकी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक ने ग्रेनेज गतिविधियों से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान कर किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
150 से अधिक किसानों ने लिया भाग, समस्याओं का हुआ समाधान
कार्यक्रम में स्थानीय क्षेत्र के 105 महिला एवं पुरुष किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके अतिरिक्त, राज्य रेशम विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याएँ एवं शंकाएँ विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा मौके पर ही तकनीकी समाधान प्रदान किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को नवीनतम तकनीकों को अपनाकर अपने रेशम उत्पादन एवं कार्य गतिविधियों में सुधार करने के लिए प्रेरित किया गया।
कोसा उत्पादन बढ़ाने पर जोर
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कोसा (टसर) उत्पादन बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। बस्तर अंचल में रेशम उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन एस.के. परिछा, क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी किसानों एवं अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
