वनमंडलाधिकारी सुकमा की तानाशाही के विरुद्ध वन कर्मचारी संघ का कड़ा विरोध, नियम विरुद्ध स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की मांग
![]() |
| वनमंडलाधिकारी सुकमा की नियम विरुद्ध स्थानांतरण कार्यशैली के खिलाफ छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ सुकमा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ ने आदेश निरस्त न होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। |
सुकमा, बस्तर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ सुकमा ने सुकमा वनमंडल में वनमंडलाधिकारी द्वारा अपनाई जा रही तानाशाही एवं कर्मचारी विरोधी कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ का आरोप है कि वनमंडलाधिकारी द्वारा फील्ड कर्मचारियों का नियमों के विपरीत स्थानांतरण किया जा रहा है, जो विभागीय दिशा-निर्देशों एवं प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं वन बल प्रमुख द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना है।
वन कर्मचारी संघ ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कर्मचारियों के हितों की उपेक्षा की गई हो। इससे पूर्व परामर्शदात्री समिति की बैठक में, जिसमें वन कर्मचारी संघ के संभागीय एवं जिला सुकमा के पदाधिकारी उपस्थित थे, कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
📋 लंबित समस्याओं की लंबी सूची
संघ ने बताया कि बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद निम्नलिखित मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया:
समयमान वेतनमान लागू करना
कर्मचारियों का स्थायीकरण
एरियर भुगतान
अन्य सेवा संबंधी मांगें
इन मांगों के निराकरण के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
⚠️ संघ ने दी चेतावनी
संघ का कहना है कि वनमंडलाधिकारी सुकमा की कार्यशैली प्रारंभ से ही कर्मचारी हितों के प्रतिकूल रही है। अब नियम विरुद्ध स्थानांतरण आदेश जारी कर कर्मचारियों में असंतोष एवं भय का वातावरण निर्मित किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
"यदि नियम विरुद्ध स्थानांतरण आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त नहीं किए जाते हैं तो संघ समस्त कर्मचारियों के साथ चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।"
🏛️ आंदोलन की जिम्मेदारी
संघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक स्थिति एवं उसके समस्त परिणामों की पूर्ण जिम्मेदारी वनमंडलाधिकारी, सुकमा की होगी।
📢 संघ के पदाधिकारी
जिला अध्यक्ष – दिलीप मांडवी
वन कर्मचारी संघ जिला सुकमा
