पिछले साल से 55% कम बारिश, धान की रोपाई पर बढ़ी चिंता; सीधी बुवाई के लिए बस्तर धान-1 और इंद्रावती धान बेहतर विकल्प
जगदलपुर | 9 जुलाई 2026
फोटो: किसानों को कम वर्षा की स्थिति में बस्तर धान-1 और इंद्रावती धान जैसी अल्प अवधि की किस्मों तथा लेही विधि से सीधी बुवाई अपनाने की सलाह विशेषज्ञों के द्वारा दी जा रही है।
बारिश में कमी के कारण कई क्षेत्रों में धान की रोपाई की गति प्रभावित हुई है। ऐसे हालात में कृषि विशेषज्ञ किसानों को परिस्थितियों के अनुसार खेती की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सोनाली कर ने बताया कि मौसम की अनिश्चितता और रोपाई में संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए बस्तर धान-1 तथा इंद्रावती धान जैसी अल्प अवधि वाली किस्में विकसित की गई हैं। ये दोनों किस्में सीधी बुवाई (Direct Seeding) के लिए उपयुक्त हैं।
उन्होंने बताया कि जिन खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो, वहां लेही (कीचड़युक्त) विधि से सीधी बुवाई की जा सकती है। इससे श्रम और समय दोनों की बचत होती है तथा रोपाई में देरी की स्थिति में भी खेती को समय पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
📊 एक नजर में वर्षा के आंकड़े
- जनवरी से 9 जुलाई 2026 : 538.5 मिमी
- जून 2026 : 171.0 मिमी
- जून से 9 जुलाई 2026 : 309.5 मिमी
- 1 से 9 जुलाई 2026 : 138.5 मिमी
- जून–जुलाई 2025 : 687 मिमी
- जून–जुलाई 2026 : 309.5 मिमी
➡ इस वर्ष जून–जुलाई में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 55% कम वर्षा दर्ज की गई है।
🌾 किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह
- लेही विधि से सीधी बुवाई करें।
- बस्तर धान-1 एवं इंद्रावती धान का चयन करें।
- बीजोपचारित एवं प्रमाणित बीज का उपयोग करें।
- खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखें।
- 30-40 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें।
- मौसम पूर्वानुमान देखकर ही कृषि कार्य करें।