कचरे से कमाई! महिला समूहों को आत्मनिर्भर बना रहा ये सेंटर, कलेक्टर ने खुद जांचा
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| कलेक्टर व सीईओ ने एमआरएफ सेंटर का निरीक्षण कर महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। प्लास्टिक अपशिष्ट से बने उत्पादों की बिक्री से हो रही आय पर चर्चा। |
कबाड़ से शुरू हुआ कारोबार
सेंटर में प्लास्टिक, कार्डबोर्ड, कांच और अन्य कचरे को अलग-अलग किया जाता है। फिर इसे रीसाइकिल कर नए उत्पादों में बदला जाता है। यहां की मशीनें रोजाना कई क्विंटल कचरे को संसाधित करती हैं। कलेक्टर ने मशीनों के संचालन से लेकर उत्पादों की बिक्री और आर्थिक गतिविधियों तक हर पहलू पर बारीकी से नजर डाली।
महिलाएं बनीं बदलाव की नायिका
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जब अधिकारियों ने सेंटर में काम कर रही महिलाओं से बातचीत की, तो उनके चेहरों पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। समूह की सदस्यों ने बताया कि कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक वेस्ट से बने सह-उत्पादों को बनाकर उनकी नियमित आमदनी हो रही है। यह सेंटर उनकी जीविका का एक भरोसेमंद जरिया बन गया है।
कलेक्टर ने महिला समूहों को नए प्रयोग करने और आय बढ़ाने के और अवसर तलाशने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रयासों को पूरा समर्थन देगी।
स्वच्छता से आत्मनिर्भरता तक का संकल्प
निरीक्षण के दौरान स्वच्छ भारत मिशन के दिलीप गोस्वामी सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सेंटर की मानव संसाधन व्यवस्था और उत्पादों की मार्केटिंग पर भी चर्चा की। यह सेंटर सिर्फ कूड़ा प्रबंधन का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बनता दिख रहा है।
