बस्तर वन कर्मचारी लामबंद: भुगतान, भत्ता व मानचित्र शाखा की समस्या को लेकर हुआ हंगामा

बस्तर वन कर्मचारी लामबंद: 17 माह से रुका जीवन निर्वाह भत्ता, मानचित्र शाखा में अराजकता तो बजट का दुरुपयोग

बस्तर वन कर्मचारी संघ की बैठक में जिलाध्यक्ष दामुधर सेठिया, अमित कुमार झा व मोहम्मद सलीम
बस्तर वन मंडल (सामान्य) एवं सामाजिक वानिकी के कर्मचारियों की लामबंद बैठक। अध्यक्षता में जिलाध्यक्ष दामुधर सेठिया, मंच पर संभागीय अध्यक्ष अमित कुमार झा व प्रदेश महामंत्री मोहम्मद सलीम उपस्थित। कर्मचारियों ने भुगतान, जीवन निर्वाह भत्ता एवं मानचित्र शाखा की समस्याएं उठाईं।
जगदलपुर | वन विभाग के कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के निवारण के लिए बस्तर वन मंडल (सामान्य) एवं सामाजिक वानिकी के कर्मचारी एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। 31 मई को कर्मचारियों के मुद्दों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए।

जिलाध्यक्ष दामुधर सेठिया की अध्यक्षता में हुआ बैठक

यह बैठक संभागीय अध्यक्ष अमित कुमार झा एवं प्रदेश महामंत्री मोहम्मद सलीम की उपस्थिति में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दामुधर सेठिया ने की। इस दौरान उपस्थित अधिकांश कर्मचारियों ने प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को लेकर नाराजगी जताई।

कर्मचारियों ने उठाईं ये 8 प्रमुख समस्याएं

पहला: समितियों के चौकीदारों का भुगतान वनमंडल स्तर पर पास ही नहीं किया जा रहा है, जिससे दिहाड़ी मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

दूसरा: वन मंडल स्तर पर नियमों के विरुद्ध भवन मरम्मत के बजट का मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है।

तीसरा: जरूरतमंद कर्मचारियों को भवन मरम्मत के समय नियम-कानून का हवाला देकर टरका दिया जाता है, जबकि ऊपर से बजट स्वीकृत है।

चौथा: छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के विपरीत एक कर्मचारी को पिछले 17 महीनों से जीवन निर्वाह भत्ता (सरवाइवल अलाउंस) नहीं दिया जा रहा है। आरोप है कि यह कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों की गलत बातों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते उसके साथ यह अन्याय किया जा रहा है।

पाँचवाँ: बस्तर वनमंडल में मैदानी कर्मचारियों से अघोषित रूप से व्यय शाखा (खाता-लगान) का पूरा कार्य कराया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उस कर्मचारी से "मनचाहा काम" लिया जा सके।

छठा: मैदानी कर्मचारियों को समय पर नक्शा (मानचित्र) और ग्रिड प्वाइंट उपलब्ध नहीं कराए जाते। जब कभी कर्मचारी मानचित्र शाखा से संपर्क करता है, तो प्रभारी अधिकारी भंडार शाखा में व्यस्त रहते हैं। मानचित्र शाखा के अधिकारी को अन्य शाखा का प्रभार देने का कोई नियम नहीं है। कर्मचारियों ने मांग की है कि भंडार शाखा में एक अलग बाबू की पोस्टिंग की जाए, ताकि मानचित्रकार अपने मूल कार्य पर ध्यान दे सके।

सातवाँ: कर्मचारी कल्याण मद के बजट से अब तक कर्मचारी कल्याण का कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।

आठवाँ: सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनके अंतिम कार्यकाल में मूल विभाग में लेना अनिवार्य है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें लघु वनोपज विभाग में रखा हुआ है। इससे संबंधित कर्मचारियों के पेंशन प्रकरण समय पर तैयार नहीं हो पाएंगे।

बैठक में लामबंद हुए सैकड़ों कर्मचारी

बैठक के अंत में वन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले को उच्च स्तर तक उठाएंगे।


बैठक में संभागीय अध्यक्ष अमित कुमार झा, प्रदेश महामंत्री मोहम्मद सलीम, जिलाध्यक्ष दामुधर सेठिया, छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ जिला बस्तर के सदस्य उपस्थित थे।

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basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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