IGKV संकट: KVK कर्मचारियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, कुलपति के विदेश दौरे से आक्रोशित हुए कर्मचारी
रायपुर: छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के अधीन संचालित सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। कर्मचारी वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा लाभों की बहाली की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
तीन दिन बीते, प्रशासन ने नहीं दिखाई गंभीरता
कर्मचारी संघ के अनुसार, हड़ताल के तीसरे दिन तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। न तो समस्या के समाधान के लिए कोई समयबद्ध योजना प्रस्तुत की गई और न ही संघ के साथ वार्ता के लिए कोई औपचारिक प्रयास किया गया। संघ का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण कर्मचारियों की समस्याएं यथावत बनी हुई हैं।
कुलपति का विदेश दौरा: कर्मचारियों में रोष
इस बीच, कुलपति महोदय के विदेश प्रस्थान को लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। संघ ने कहा कि जहां कर्मचारी 18 महीने से वेतन और सेवा लाभों से वंचित हैं, वहीं कुलपति का विदेश दौरा प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
वार्ता विफल, प्रशासन उदासीन
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि हड़ताल के पहले दिन कुलपति स्तर पर हुई वार्ता में भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। समस्याओं को राज्य शासन या वित्तीय प्रक्रियाओं से जोड़कर टाल दिया गया। संघ का कहना है कि सभी वैधानिक दिशा-निर्देश और न्यायालयीन आदेश पहले से मौजूद हैं, लेकिन प्रशासन उनका पालन करने को तैयार नहीं है।
न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना का आरोप
संघ ने स्पष्ट किया है कि ICAR के दिशा-निर्देशों और माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद वेतन और सेवा-लाभों का भुगतान न करना अदालती अवहेलना के समान है। कर्मचारियों का कहना है कि 75% वेतन ICAR द्वारा दिया जाना है और शेष 25% का दायित्व विश्वविद्यालय का है, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं हो रहा है।
किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव
लगातार तीसरे दिन जारी हड़ताल का असर किसानों और कृषि विस्तार सेवाओं पर पड़ रहा है। कर्मचारी संघ का कहना है कि उत्पन्न होने वाली समस्त शैक्षणिक और प्रसारगत अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
संघ की स्पष्ट चेतावनी
कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, लेकिन कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। संघ ने प्रशासन से तत्काल समयबद्ध निर्णय लेने और वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसानों को निर्बाध सेवाएं मिल सकें।
