एनएमडीसी अपोलो हॉस्पिटल बचेली में मरीजों के परिजनों का बसेरा बदहाल, शौचालय जाम, गंदगी का अंबार
संवाददाता: ब्रम्हा सोनानी
बचेली। एनएमडीसी द्वारा संचालित अपोलो हॉस्पिटल बचेली में एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों के लिए बनाया गया 'बसेरा' आज बदहाली का शिकार हो चुका है। यहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।
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बसेरे की वास्तविक स्थिति
इस बसेरे को एनएमडीसी ने इस उद्देश्य से बनवाया था कि इलाज के दौरान परिजन सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रह सकें। लेकिन आज हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है:
बसेरे के शौचालय पूरी तरह जाम हैं और इस्तेमाल के लायक नहीं रह गए हैं।
पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई है।
नियमित सफाई या रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं दिखती।
कमरों में न बेड उपलब्ध हैं, न बैठने या सोने की समुचित सुविधा।
आदिवासी परिवारों के लिए मुसीबत
बचेली आदिवासी बहुल क्षेत्र में आता है। सुदूर गांवों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजन मजबूरी में इसी बसेरे में ठहरते हैं। लेकिन अव्यवस्था के चलते उन्हें अमानवीय हालात में रहना पड़ रहा है।
एक परिजन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यहां रहना मुसीबत है। शौचालय इतने गंदे हैं कि जाना मुहाल है। रात को ठीक से सो भी नहीं पाते। अस्पताल में मरीज है, यहां खुद परेशान।"
लोगों की मांग
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने इस स्थिति पर गहरा रोष जताया है। उनका कहना है कि एनएमडीसी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी और अपोलो जैसे नामी अस्पताल से इस तरह की संवेदनहीनता की उम्मीद नहीं थी।
उनकी मांग है कि बसेरे की तत्काल सफाई कराई जाए, टूटी-फूटी चीजों की मरम्मत हो और आवश्यक सुविधाएं बहाल की जाएं।
सवाल बना हुआ है
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर जल्द कार्रवाई करेंगे? या फिर मरीजों के परिजनों की यह पीड़ा अनसुनी बनी रहेगी?
नोट: यह खबर स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों के साक्षात्कार पर आधारित है। अस्पताल प्रशासन और एनएमडीसी प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी।