बस्तर में गूंजा साइबर सुरक्षा का मंत्र: उपमुख्यमंत्री अरुण साव बोले—सतर्कता ही सबसे बड़ी ढाल, युवा बनें सुरक्षा दूत

बस्तर में गूंजा साइबर सुरक्षा का मंत्र: उपमुख्यमंत्री अरुण साव बोले—'सतर्कता ही सबसे बड़ी ढाल, युवा बनें समाज के सुरक्षा दूत'

बस्तर विश्वविद्यालय सभागार में साइबर जन-जागृति अभियान कार्यशाला में उद्बोधन देते उपमुख्यमंत्री अरुण साव, IG बद्री नारायण मीणा, SP शलभ सिन्हा, कलेक्टर आकाश छिकारा, महापौर संजय पांडेय व कुलपति प्रो. मनोज श्रीवास्तव मंचासीन
जगदलपुर। बस्तर विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में जिला पुलिस द्वारा आयोजित 'साइबर जन-जागृति अभियान' कार्यशाला में उद्बोधन देते माननीय उपमुख्यमंत्री अरुण साव। इस अवसर पर IG बस्तर बद्री नारायण मीणा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, कलेक्टर आकाश छिकारा, महापौर संजय पांडेय, नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर, नगर पुलिस अधीक्षक सुमितकुमार धोत्रे एवं कुलपति प्रो. मनोज श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
जगदलपुर, 11 सितम्बर 2026। बस्तर विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में जिला पुलिस द्वारा आयोजित 'साइबर जन-जागृति अभियान' के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक संचालित इस अभियान के तहत बस्तर विश्वविद्यालय के सहयोग एवं जिला प्रशासन के समन्वय से यह विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें डिजिटल तकनीक के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन अपराधों की रोकथाम पर गहन मंथन हुआ।

उपमुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति

बस्तर विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित साइबर जन-जागृति अभियान कार्यशाला में सामने की पंक्ति में बैठे पुलिस अधिकारी एवं भाजपा नेता व अन्य अतिथि
जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में जिला पुलिस द्वारा आयोजित 'साइबर जन-जागृति अभियान' कार्यशाला में बैठे पुलिस अधिकारी एवं भाजपा नेता। विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने युवाओं और जनसमूह को संबोधित करते हुए साइबर सुरक्षा को वर्तमान युग की अनिवार्य आवश्यकता बताया।

इस अवसर पर IG बस्तर बद्री नारायण मीणा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, कलेक्टर आकाश छिकारा, महापौर संजय पांडेय, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर एवं नगर पुलिस अधीक्षक सुमितकुमार धोत्रे सहित पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में आयोजित हुआ।

"तकनीक के विस्तार से बदल गए अपराध के तौर-तरीके"

उप मुख्यमंत्री साव ने बदलते समय की तुलना करते हुए कहा कि पहले घरों की सुरक्षा के लिए सामान्य सांकल या ताले पर्याप्त थे। लेकिन आज, तकनीक के तेज विस्तार से पूरी दुनिया एक मोबाइल में सिमट गई है। जब वित्तीय लेन-देन और सभी महत्वपूर्ण कार्य डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं, तो अपराधियों के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं

साइबर ठगी के मूल कारणों पर प्रकाश

साव ने साइबर ठगी के मूल कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोग अक्सर डर, लालच, अत्यधिक अंधविश्वास और जल्दबाजी के चलते जालसाजों के जाल में फंसते हैं:

  • किसी अनजान धमकी के खौफ में आना

  • कम समय में अधिक लाभ का लोभ

  • बिना पड़ताल के भरोसा करना

  • निजी जानकारी व ओटीपी साझा कर देना

"युवा बनें समाज के सुरक्षा दूत"

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे स्वयं तकनीकी रूप से सक्षम हैं, इसलिए यह उनकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे घर के बुजुर्गों, माता-पिता और कम पढ़े-लिखे नागरिकों को इस खतरे के प्रति सचेत करें, ताकि किसी भी गरीब या आम व्यक्ति की मेहनत की कमाई न लुट जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा:

"पुलिस का काम एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करना है, लेकिन ठगी होने से पहले ही समाज को सुरक्षित रखने की असली कमान युवा पीढ़ी के हाथों में है।"

महापौर ने दिया 'पीओएलआईसीई' का सुरक्षा सूत्र

जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डे ने भी डिजिटल युग में बढ़ रहे अपराधों को लेकर नागरिकों को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कार्यशैली बदल चुकी है; वे घरों की चहारदीवारी फांदने के बजाय मोबाइल स्क्रीन के जरिए चुपचाप हमारे निजी जीवन में दाखिल हो रहे हैं

महापौर ने केवाईसी अपडेट, पार्सल डिलीवरी और रकम दोगुनी करने के झांसे देकर होने वाली ठगी के उदाहरण दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक या पुलिस कभी गोपनीय विवरण नहीं मांगती। लोगों को समझना होगा कि यूपीआई पिन हमेशा पैसे भेजने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए कभी नहीं।

📌 'पीओएलआईसीई' अर्थात 'पुलिस' का सुरक्षा सूत्र

अक्षरसुरक्षा नियम
पीपासवर्ड किसी को न बताएं
ओटीपी गोपनीय रखें
एललिंक अनजान हो तो क्लिक न करें
आईपहचान (निजी जानकारी) सार्वजनिक न करें
सीचैटिंग अपरिचितों से न करें
एहतियात बरतें

'डिजिटल अरेस्ट' पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए महापौर ने साफ किया कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कम से कम दस से पंद्रह लोगों को जागरूक कर इस अभियान के सक्रिय दूत बनें

कुलपति ने साझा किए चौंकाने वाले आंकड़े

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बस्तर पुलिस की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए:

वर्षसाइबर मामले (राष्ट्रीय स्तर)
202210 लाख
202422 लाख से अधिक

पीड़ितों को लगभग 31,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि विगत एक दशक में देश डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है, और लगभग 86 प्रतिशत परिवार इंटरनेट से जुड़ चुके हैं। छत्तीसगढ़ में भी मामलों की वृद्धि दर चिंताजनक है।

कुलपति ने युवाओं को 'साइबर हाइजीन' और डिजिटल साक्षरता का पाठ पढ़ाने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

एसपी ने बताए शातिर ठगों के नए तौर-तरीके

नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने शातिर ठगों के नए तौर-तरीकों से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पुलिस के अभियानों के तहत अब तक जिले के लगभग साढ़े तीन से चार लाख लोगों को जागरूक किया जा चुका है।

⚠️ एपीके फाइल आधारित फ्रॉड पर आगाह

सिन्हा ने एपीके फाइल आधारित फ्रॉड पर आगाह किया। जालसाज बिजली बिल, ट्रैफिक चालान, आरटीओ नोटिस या शादी के डिजिटल निमंत्रण के नाम पर संदेश भेजकर लोगों को झांसे में लेते हैं। इन फाइलों को डाउनलोड करते ही मोबाइल का नियंत्रण हैकर्स के हाथों में चला जाता है

उन्होंने किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक न करने की अपील की, भले ही वह संदेश किसी परिचित से आया हो

'डिजिटल अरेस्ट' के झूठे भय पर स्पष्टीकरण

एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस हमेशा भौतिक रूप से उपस्थित होकर ही कानूनी कार्रवाई करती है। उन्होंने सुझाव दिया:

  • व्हाट्सएप पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें

  • सोशल मीडिया प्रोफाइल सुरक्षित रखें

  • निजी दिनचर्या सार्वजनिक मंचों पर साझा न करें

उन्होंने अंत में कहा कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देर किए तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दे, ताकि बैंक स्तर पर लेन-देन रोककर डूबी रकम वापस दिलाई जा सके।

विद्यार्थियों को दी गई साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी

कार्यक्रम में MBA एवं बस्तर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को निम्नलिखित साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई:

क्र.साइबर अपराध का प्रकार
1फिशिंग लिंक
2OTP एवं QR Code फ्रॉड
3फर्जी KYC
4सोशल मीडिया फ्रॉड
5डिजिटल अरेस्ट
6एपीके फाइल फ्रॉड

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर एवं नगर पुलिस अधीक्षक सुमितकुमार धोत्रे सहित पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ साइबर सुरक्षा पर संवाद किया।

2 अक्टूबर को होगा अभियान का समापन

15 अगस्त से बस्तर पुलिस द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर लगातार साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का समापन कार्यक्रम 2 अक्टूबर 2026, गांधी जयंती के अवसर पर होगा।

बस्तर पुलिस की अपील

बस्तर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं और तत्काल 1930 पर संपर्क करें।

"सतर्क रहें, जागरूक रहें—सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।"
बस्तर पुलिस


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basant dahiya

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