सिंधी समाज सोमवार को हर्षोल्लास से मनाएगा तीजड़ी पर्व, जानें पूजन विधि और कथा
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| 📷 जगदलपुर के सिंधी गुरुद्वारे में तीजड़ी पर्व की विशेष तैयारियाँ जारी हैं। समाज की महिलाएं 31 अगस्त को इस पावन पर्व को धूमधाम से मनाएंगी और पति-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी। |
जगदलपुर। सिंधी समाज द्वारा तीजड़ी पर्व (सिंधी तीज) सामाजिक परंपरा और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। सिंधी समाज की महिलाओं की ओर से इस पर्व की विशेष तैयारी सिंधी गुरुद्वारे में की जा रही है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है।
31 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व
सिंधी पंचायत की पूजन प्रभारी चंद्रा देवी नवतानी ने बताया कि तीजड़ी पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। समाज की महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र, संतान की खुशहाली और परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
पूजन विधि और परंपरा
सिंधी गुरुद्वारे में तीजड़ी की कथा सुनने के बाद महिलाएं झूले पर एक मटके में बोए गए हरे मूंग, गेहूं और तिल की पूजा करती हैं। यह पर्व देवी पार्वती के अपने पति भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है।
सिंधी समाज की सुहिणी सोच महिला विंग अध्यक्षा लक्ष्मी नवतानी ने तीजड़ी व्रत की पूजन विधि और कथा की जानकारी दी:
असुर सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना और 'असुर' ग्रहण करना, जिसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है।
तीजड़ी की पूर्व संध्या पर महिलाएं हाथों में मेहंदी रचाती हैं और सोलह श्रृंगार कर तैयार होती हैं।
शाम के समय तीजड़ी माता (गौरी माता) की मिट्टी की मूर्ति या चित्र स्थापित करके पूजा की जाती है। माता को फल, फूल, सिंदूर, रोली, ककड़ी अर्पित की जाती है।
रात में चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दिया जाता है, जिसमें जल, दूध और कौड़ी अर्पण की जाती है।
व्रत की पौराणिक कथा
महिला विंग सचिव भारती लालवानी ने बताया कि मान्यता के अनुसार, एक साहूकार की सात बहुएं थीं। सबसे छोटी बहू अत्यंत पतिव्रता और श्रद्धालु थी। उसने पूरे भक्ति भाव से तीजड़ी माता का निर्जला व्रत रखा और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही जल व प्रसाद ग्रहण किया। उसकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर तीजड़ी माता ने उसके पति को दीर्घायु और संकटों से रक्षा का वरदान दिया। तभी से सिंधी समुदाय की महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए यह कथा सुनकर व्रत रखती हैं।
सामूहिक आयोजन
सिंधी गुरुद्वारा में सुबह और शाम को समाज की सभी महिलाएं मिलकर तीजड़ी त्योहार मनाएंगी और खुशियाँ बाँटेंगी।
