ईमानदारी की मिसाल: जगदलपुर के गार्ड कृष्णा यादव ने ₹25,000 व दस्तावेज लौटाकर मानवता का किया सम्मान
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| 📷 सुरक्षा गार्ड कृष्णा यादव, जिन्होंने अपनी ईमानदारी से ₹25,000 नकद व महत्वपूर्ण दस्तावेज मालिक प्रज्ञा मंडावी को लौटाकर मानवता की मिसाल पेश की। कृष्णा यादव ने कहा- 'लालच नहीं, जिम्मेदारी बड़ी है।' |
गार्ड ने लालच को ठुकराया, जिम्मेदारी को चुना
प्रज्ञा मंडावी, जो योग प्रशिक्षिका हैं और शहर से आकर अविनाश अतुल्य सोसायटी, गीदम रोड में योग प्रशिक्षण देती हैं, हाल ही में सोसायटी परिसर के क्लब हाउस में ₹25,000 नकद एवं कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भूल गईं।
सोसायटी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत कृष्णा यादव (पिता रघुनाथ यादव, उम्र 30 वर्ष, निवासी रेलवे सरगीपाल जूनापारा, जगदलपुर) को जब यह राशि एवं दस्तावेज प्राप्त हुए, तो उनके समक्ष एक अवसर था—किन्तु उन्होंने उस अवसर को लालच नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझा। उन्होंने पूर्ण ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए ₹25,000 की संपूर्ण राशि एवं सभी दस्तावेज प्रज्ञा मंडावी को सुरक्षित लौटा दिए।
आंतरिक संस्कारों की जीत
कृष्णा यादव ने यह सिद्ध किया कि ईमानदारी बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक संस्कारों से उत्पन्न होती है। ₹25,000 की राशि भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन कृष्णा यादव ने उसके बदले जो अर्जित किया है—सम्मान, विश्वास और समाज में एक सशक्त प्रतिष्ठा—वह कहीं अधिक मूल्यवान है।
समाज ने दी सराहना
इस घटना के बाद कृष्णा यादव की ईमानदारी की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। लोग उनके इस प्रेरणादायक कार्य की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि—
"परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके चरित्र से ही निर्धारित होती है।"
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