वन कर्मचारी संघ ने ठेका पद्धति का किया विरोध, बोला- वन विभाग के कर्मचारी ही कर सकते हैं बेहतर काम
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, जिला बस्तर ने वन विभाग में सिविल निर्माण कार्यों एवं अन्य विभागीय कार्यों को ठेका पद्धति से कराए जाने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से वन सम्पदा को नुकसान होगा और स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अजीत दुबे, छ.ग. वन कर्मचारी संघ, प्रांताध्यक्ष
संघ ने उठाई आपत्ति
छ.ग. वन कर्मचारी संघ, रायपुर के प्रांताध्यक्ष अजीत दुबे के माध्यम से संघ को जानकारी मिली है कि वन विभाग में सिविल निर्माण कार्यों एवं अन्य विभागीय कार्यों को ठेका पद्धति से कराने की तैयारी/प्रस्ताव किया जा रहा है। इस संभावित बदलाव ने वनरक्षक, वनपाल एवं उपवनक्षेत्रपाल सहित समस्त मैदानी स्तर के कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर दिया है।
संघ ने क्यों किया विरोध?
संघ का मानना है कि वन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय आवश्यकता एवं वन संरक्षण/संवर्धन के कार्य को शासकीय कर्मचारी ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं। संघ के अनुसार, भारतीय वन अधिनियम 1927 की समस्त धाराओं का पालन करते हुए कर्मचारी वर्षों से अपनी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं, जो बाहरी ठेकेदार नहीं कर सकते। संघ को आशंका है कि ठेकेदार वन क्षेत्रों के काष्ठ का दुरुपयोग करेंगे, जिससे वन सम्पदा को क्षति होगी।
संघ की तर्कसंगत दलीलें
संघ ने अपने विरोध में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे हैं:
बजट की सीमा: वन विभाग की योजनाओं का बजट सीमित होता है, जिसमें ठेकेदारों के लाभ का समायोजन नहीं हो पाता। कर्मचारी कम राशि में उत्तम गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण कराते हैं।
विभागीय नियंत्रण का अभाव: ठेकेदारों के कार्यों पर विभागीय नियंत्रण नहीं रह पाएगा, जिससे श्रमिकों का आर्थिक शोषण हो सकता है।
स्थानीय रोजगार पर प्रभाव: ठेकेदार बाहरी श्रमिकों का उपयोग करेंगे, जिससे स्थानीय ग्रामीणों एवं वन आश्रित परिवारों के रोजगार में अत्यधिक कमी आएगी।
संघ की प्रमुख मांगें
संघ ने तत्काल निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
वन विभाग के सिविल निर्माण कार्यों को ठेका पद्धति पर हस्तांतरित करने की व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए।
वृक्षारोपण, कूप कटाई, जल संरक्षण, वन सुरक्षा एवं अन्य मैदानी विभागीय कार्यों में विभागीय अमले की भूमिका एवं अधिकारिता पूर्ववत बनाई जाए।
स्थानीय ग्रामीणों एवं वन सुरक्षा समितियों की सहभागिता से विभागीय स्तर पर कार्य संपादित कराने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।