🖼️ स्मृतिचित्र : दिवंगत शिक्षाविद् डॉ. प्रो. बसंत लाल झा – जिन्होंने बस्तर में उच्च शिक्षा की मजबूत नींव रखी और शिक्षा, संस्कृति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।
शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति: बस्तर के युगपुरुष डॉ. प्रो. बसंत लाल झा का 103 वर्ष की आयु में निधन
🕊️ जगदलपुर, 29 जुलाई 2026 📖 शिक्षा जगत 🏷️ बस्तर
जगदलपुर। बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत के लिए अत्यंत दुःखद समाचार है। प्रख्यात शिक्षाविद्, विद्वान, चिंतक एवं समाजसेवी डॉ. प्रो. बसंत लाल झा का आज 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक जीवन के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान हो गया है।
उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण शिक्षा के प्रसार, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज के बौद्धिक विकास के लिए समर्पित किया।
वे केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् थे। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अनेक शैक्षणिक सम्मेलनों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और अपने शोध एवं विचारों से देश-विदेश के विद्वानों को प्रभावित किया।
बस्तर के जननायक महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव से उनके अत्यंत आत्मीय संबंध रहे। बस्तर की संस्कृति, इतिहास और जनजातीय विरासत के संरक्षण के लिए दोनों की सोच में गहरा सामंजस्य था।
संस्कृत, हिंदी, उर्दू और फ्रेंच भाषा पर उनका गहन अधिकार था। बस्तर के इतिहास, भारतीय दर्शन, साहित्य और भाषा विज्ञान पर उनका अध्ययन अत्यंत व्यापक था। वे बहुभाषाविद् होने के साथ-साथ उत्कृष्ट लेखक और शोधकर्ता भी थे।
उनकी विद्वत्ता और आध्यात्मिक योगदान के लिए उन्हें “रामकथा शिरोमणि” जैसी प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया। देशभर में रामकथा, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
वे विश्व हिंदू परिषद में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
बस्तर के राष्ट्रीय विद्यालय एवं विद्यापति अकादमी विद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।