डॉ. कोमल गुप्ता ने बताए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय
बस्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 134वें “मन की बात” कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बस्तर द्वारा “मन की बात किसानों के साथ” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. के. नाग के मार्गदर्शन में 31 मई को ग्राम छापर भानपुरी में संपन्न हुआ।
PM मोदी का संदेश: आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” को सामूहिक रूप से सुना। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता, जनभागीदारी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। किसानों ने इन प्रेरणादायी विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और आत्मसात किया।
खरीफ मौसम की तैयारियों पर हुई विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम के बाद किसानों के साथ आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों एवं कृषि प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने मौसम की चुनौतियों, फसल सुरक्षा और लागत घटाने के उपाय बताए।
मिट्टी की उर्वरता और संतुलित उर्वरक पर जोर
कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर की विषय वस्तु विशेषज्ञ (शस्य विज्ञान) डॉ. कोमल गुप्ता ने किसानों को बदलती जलवायु में फसलों की सुरक्षा, खेतों की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन लागत कम करने के उपाय बताए। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के महत्व और लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
हरित खाद से होगी रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम
विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) डॉ. वेंकटेश्वर जल्लारफ ने बताया कि हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं जैविक कार्बन बढ़ता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने और वैज्ञानिक पद्धतियों से बेहतर उत्पादन व आय प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
25 किसान और जनप्रतिनिधि रहे शामिल
इस लाइव प्रसारण कार्यक्रम में लगभग 20-25 किसान उपस्थित रहे। श्रीमती दशमी कश्यप (सरपंच), श्री बुधरू बघेल (उप सरपंच), जीवनाथ मौर्य (पूर्व सरपंच) सहित अन्य जनप्रतिनिधि व ग्रामीणजन भी सम्मिलित हुए। किसानों ने अपनी कृषि संबंधी समस्याएं और जिज्ञासाएं साझा कीं, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया।
किसानों ने की कार्यक्रम की सराहना
उपस्थित किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर द्वारा समय-समय पर आयोजित ऐसे कार्यक्रमों की सराहना की और भविष्य में भी इसी तरह के आयोजनों की मांग की।
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