25 साल बाद भी चित्तू पारा में न पानी, न सफाई – वार्डवासियों में रोष
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| नगर पालिका बचेली के चित्तूपारा में साफ-सफाई के अभाव में पसरी गंदगी। |
बचेली। बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझती इस बस्ती ने अपने अस्तित्व के 25 साल पूरे कर लिए, लेकिन आज भी यहाँ के लिए पानी और सफाई एक सपना बनी हुई है। 60 से 65 परिवारों की जिंदगी दिन-ब-दिन संकट में बदतर होती जा रही है। हम बात कर रहे हैं नगर पालिका बचेली के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक दस चित्तूपारा की।
सिर्फ 15-20 मिनट मिलता है पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, वार्डवासियों को दिनभर में मात्र 15 से 20 मिनट ही पानी मिल पाता है। अब तक कभी आधे घंटे से अधिक पानी की सप्लाई नहीं हुई। गर्मी के मौसम में तो हालात और भी दयनीय हो जाते हैं। महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन टोंटी से पानी निकलना किस्मत पर निर्भर करता है।
चारों तरफ गंदगी, बीमारियों का खतरा
इलाके का हाल बेहद चिंताजनक है। नालियाँ कूड़े और गंदगी से पटी पड़ी हैं, जिससे भीषण बदबू फैली हुई है। मच्छरों और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों का आरोप है – "सफाई कर्मचारी साल में एक या दो बार ही दिखाई देते हैं। बाकी समय यह इलाका 'भगवान भरोसे' छोड़ दिया जाता है।"
नगरपालिका के आश्वासनों पर फिरा विश्वास
वार्डवासियों ने नगरपालिका के अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हर बार सिर्फ आश्वासनों का खेल होता है – मगर जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
आंदोलन की चेतावनी
लगातार हो रही अनदेखी से लोगों में आक्रोश उबल रहा है। वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएँगे।
सवाल: आखिर 25 साल से बसे इस वार्ड क्रमांक 10 चित्तू पारा को बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित रखा गया? क्या जिम्मेदार अधिकारी अब भी आँखें मूँदे रहेंगे, या कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
(प्रतीक्षा है कि प्रशासन इस ओर गंभीरता दिखाए या फिर वार्डवासी सड़कों पर उतरेंगे।)
