छत्तीसगढ़: बसों में स्पीड गवर्नर नहीं लगाए तो बड़ा आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का आरटीओ को इतिश्री
जगदलपुर, 27 मई 2026। प्रदेश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बीच जन अधिकार मोर्चा ने सरकार पर शिकंजा कस दिया है। संगठन ने 26 मई को बस्तर के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश की सभी यात्री बसों में गति नियंत्रक उपकरण (स्पीड गवर्नर) तत्काल लगाने की मांग की है।प्रदेश प्रभारी कर्मवीर सिंह ने चेतावनी दी कि तेज रफ्तार बसें आम नागरिकों के लिए 'मौत का सौदागर' बन चुकी हैं। हाल ही में रायपुर-बस्तर मार्ग पर एक शिक्षिका की मौत के बाद संगठन ने यह मांग तेज कर दी है।
📌 जन अधिकार मोर्चा की मुख्य मांगें
सभी निजी ट्रेवल्स और यात्री बसों में स्पीड कंट्रोलर (गति नियंत्रक) अनिवार्य रूप से लगाया जाए।
निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को जनहित का विषय मानते हुए तत्काल प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करे।
ज्ञापन देने वालों में शामिल: चंद्रिका सिंह, रवि तिवारी, जयंत साहू, विनय मंडल, धीरेन्द्र ठाकुर, मान सिंह, किरण देवांगन।
जारीकर्ता: कर्मवीर सिंह (प्रदेश प्रभारी, जन अधिकार मोर्चा, छत्तीसगढ़)
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का आदेश
👉 RTO पर शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन क्यों नहीं?
जन अधिकार मोर्चा ने साफ कहा कि केवल ज्ञापन देने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश का हवाला देते हुए आरटीओ (RTO) से सवाल किया कि आखिर अदालत के आदेश के बाद भी भारी वाहनों में स्पीड गवर्नर क्यों नहीं लगाए जा रहे?
संगठन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सभी भारी वाहनों (बसें, ट्रक, ट्रेवल्स) में स्पीड गवर्नर लगाने और निर्धारित गति (सामान्यतः 80 किमी/घंटा) से अधिक चलने पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सड़कों पर ओवरस्पीड वाहन दौड़ रहे हैं।
जन अधिकार मोर्चा ने आरटीओ से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करवाया जाए और बगैर स्पीड गवर्नर वाले भारी वाहनों का परमिट रद्द किया जाए।
