बंद हो चुकी पारंपरिक ढेकी का पुनर्जीवन, टीम ने की सराहना
जगदलपुर, 28 मई 2026। बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक कौशल और स्थानीय उत्पादों को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है। इसी कड़ी में बुधवार को अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बस्तर जिले के नेतानार गांव पहुंचा।प्रतिनिधिमंडल ने ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ (सीआरपीएफ कैंप परिसर) का दौरा कर वहां संचालित महिला उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों को बारीकी से समझा। इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन समेत वन, कृषि और अन्य विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
सिलाई केंद्र का निरीक्षण, महिलाओं ने बताई योजना
टीम ने सबसे पहले सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का जायजा लिया। स्थानीय दीदियों ने बताया कि 10 किलोमीटर के दायरे में कोई अन्य सिलाई केंद्र नहीं होने के कारण यहां कपड़ों की अधिक मांग है। महिलाएं प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अपने घरों के पास खुद का बुटीक खोलने की योजना बना रही हैं। एनआईडी टीम ने इस पहल की सराहना करते हुए उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने के टिप्स दिए।
पारंपरिक ढेकी और इमली प्रोसेसिंग यूनिट ने बढ़ाया उम्मीदें
टीम ने बस्तर की लगभग बंद हो चुकी पारंपरिक ढेकी चावल यूनिट का भी निरीक्षण किया, जिसे महिलाओं ने पुनर्जीवित किया है। दीदियों ने बताया कि वे इस उत्पाद को प्रदेश के बाजारों में बेच रही हैं और आगे भी हर जगह आपूर्ति के लिए तैयार हैं।
इसके अलावा इमली प्रोसेसिंग यूनिट में महिलाओं द्वारा ‘इमली चपाती’ बनाने, ब्रांडिंग और पैकेजिंग करने की पूरी प्रक्रिया देखी गई। एनआईडी टीम ने इसे ग्रामीण स्तर पर एक सराहनीय पहल बताया।
‘सेवा केंद्र’ ग्रामीणों के लिए वरदान
प्रतिनिधिमंडल ने परिसर में स्थापित विशेष सेवा केंद्र की उपयोगिता को भी समझा। यह केंद्र ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा, पैसे जमा-निकासी और नागरिक कार्ड से जुड़ी सुविधाएं प्रदान कर रहा है, जिससे लोगों को दूर-दराज जाने की जरूरत नहीं होती।
