बस्तर पठार में उद्यानिकी विकास को मिली नई दिशा
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| 15 मई 2026 को केडीसीएचआरएस, जगदलपुर में आयोजित जोनल वार्षिक समीक्षा बैठक – जोन III, बस्तर पठार के दौरान उपस्थित समस्त अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारी। |
डॉ. जितेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में बनी आगामी रणनीति
कार्यक्रम का कुशल संचालन अनुसंधान सेवा निदेशक डॉ. जितेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 के लिए अनुसंधान, फार्म एवं विस्तार गतिविधियों की एक ठोस रणनीतिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने विशेष रूप से ‘छत्तीसगढ़ नंदीराज’ आम किस्म के मातृ उद्यान विकसित करने के निर्देश दिए और बस्तर पठार को विविध उद्यानिकी फसलों के लिए अत्यंत संभावनाशील बताया।
मुख्य अतिथि महादेव सिंह ध्रुव ने किसानों की आय पर दिया जोर
बैठक में बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक कृषि महादेव सिंह ध्रुव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने हेतु टिकाऊ उद्यानिकी विकास, फसल सघनता में वृद्धि तथा स्थान-विशिष्ट अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेष अतिथियों के सुझाव: यंत्रीकरण, बहुस्तरीय खेती और स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण
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| जोनल वार्षिक समीक्षा बैठक के दौरान अधिष्ठाता द्वारा संयुक्त संचालक कृषि को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते हुए। |
विशेष अतिथियों में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.के. नाग, उप संचालक उद्यानिकी श्रीमति आकांक्षा सिन्हा तथा उप संचालक कृषि राजीव श्रीवास्तव शामिल रहे।
डॉ. एस.के. नाग ने कृषि कार्यों में श्रम कठिनाइयों को कम करने के लिए यंत्रीकरण एवं ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने तथा किसानों को स्थानीय बोली में प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
सुश्री आकांक्षा सिन्हा ने बस्तर क्षेत्र को काजू, कॉफी, नारियल, लीची एवं ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त बताते हुए सब्जी बीज उत्पादन को आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बताया।
राजीव श्रीवास्तव ने कृषि, उद्यानिकी एवं शैक्षणिक संस्थानों के मध्य समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
बहुस्तरीय कृषि मॉडल का अवलोकन: कॉफी, सुपारी, अनानास और लीची
कार्यक्रम के उपरांत अतिथियों ने बस्तर क्षेत्र के बहुस्तरीय कृषि मॉडल का अवलोकन किया, जहाँ किसानों से सीधे संवाद करते हुए कॉफी आधारित बहुस्तरीय खेती प्रणाली के अंतर्गत सुपारी, कॉफी, अनानास, लीची एवं अन्य उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती का निरीक्षण किया गया। इस दौरान लीची को उभरती हुई उद्यानिकी फसल तथा नारियल की खेती को बस्तर क्षेत्र में अत्यधिक संभावनाशील बताते हुए इसे कृषि विविधीकरण, टिकाऊ खेती एवं किसानों की आय वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।
सक्रिय सहभागिता एवं धन्यवाद ज्ञापन
बैठक के दौरान केडीसीएचआरएस, जगदलपुर के वैज्ञानिक डॉ. आर.के. देवांगन (फल विज्ञान विशेषज्ञ) तथा इंजीनियर भगवत कुमार (वैज्ञानिक, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन) सहित अन्य वैज्ञानिकों एवं अतिथि प्राध्यापकों ने तकनीकी चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का समापन इंजीनियर भगवत कुमार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

