हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी पेंशन से वंचित: जगदलपुर की दो शिक्षिकाओं ने 20 साल सेवा के बाद भी नहीं देखी पेंशन, 2028 से पहले रिटायर हो रहे हजारों शिक्षक बेसहारा
श्रीमती बृजेश्वरी पोद्दार (1998-2023) और श्रीमती रजनी गुप्ता (2008-2026) का दर्द भरा सच; संविलियन के बाद 10 साल पूरे न होने पर शून्य हुई पेंशन
जगदलपुर। 1998 में जब श्रीमती बृजेश्वरी पोद्दार ने शिक्षाकर्मी के रूप में नौकरी शुरू की थी, तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि 2023 में रिटायरमेंट के बाद उनके पास आजीविका का कोई सहारा नहीं होगा। उन्होंने करीब 25 साल सेवा की, लेकिन आज वह पेंशन से वंचित हैं।
श्रीमती रजनी गुप्ता ने 2008 में नौकरी शुरू की पूर्व और 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुईं। 18 साल की सेवा के बाद भी वह पेंशन की हकदार नहीं हैं।
क्यों? क्योंकि 2018 में शिक्षाकर्मियों के संविलियन के समय शासन ने एक शर्त रख दी थी - संविलियन के बाद कम से कम 10 साल सेवा पूरी करने पर ही पेंशन मिलेगी। और इस शर्त के तहत शासन ने शिक्षकों की 'वर्तमान सेवा' की गणना 2018 से शुरू कर दी।
1998-2018: 20 साल की सेवा हुई शून्य
श्रीमती बृजेश्वरी पोद्दार के मामले में:
नियुक्ति: 1998
संविलियन: 2018 (20 साल सेवा के बाद)
सेवानिवृत्ति: 2023
संविलियन के बाद सेवा: केवल 5 साल
पेंशन के लिए आवश्यक: 10 साल
परिणाम: पेंशन शून्य
श्रीमती रजनी गुप्ता के मामले में:
नियुक्ति: 2008
संविलियन: 2018 (10 साल सेवा के बाद)
सेवानिवृत्ति: 31 मार्च 2026
संविलियन के बाद सेवा: 8 साल
पेंशन के लिए आवश्यक: 10 साल
परिणाम: पेंशन शून्य (2 साल कम)
'हमने सेवा दी, पर पेंशन नहीं मिली' - शिक्षिकाओं का दर्द
श्रीमती रजनी गुप्ता (पूर्व माध्यमिक शाला कुरंदी, जगदलपुर) दर्द भरे स्वर में कहती हैं:
"हमने बच्चों को पढ़ाने में अपनी जिंदगी लगा दी। 2008 से लगातार सेवा की। रिटायरमेंट के बाद सोचा था कि पेंशन से गुजारा हो जाएगा, लेकिन अब पता चला कि हमें कुछ नहीं मिलेगा। 10 साल की शर्त में हमारे 2 साल कम रह गए। क्या यह न्याय है?"
श्रीमती बृजेश्वरी पोद्दार (नियुक्ति 1998, सेवानिवृत्ति 2023) कहती हैं:
"25 साल से अधिक सेवा की, संविलियन के लिए 20 साल तक संघर्ष किया, लेकिन आज रिटायरमेंट के बाद हमारे पास कुछ नहीं है। पहले की 20 साल की सेवा पेंशन के लिए शून्य कर दी गई। हम जैसे सैकड़ों शिक्षकों के साथ यह अन्याय हो रहा है।"
हाईकोर्ट का साफ फैसला, लेकिन शासन की चुप्पी
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि संविलियन से पूर्व की सेवा को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सरकार को पूर्व सेवा को OPS में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
लेकिन इस फैसले के बाद भी जगदलपुर जैसे शहरों में शिक्षक पेंशन से वंचित हैं।
शिक्षक संघ की मांग: 'पूर्व सेवा को नकारा नहीं जा सकता'
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि "संविलियन के पूर्व की सेवा को नकारा नहीं जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि लंबी सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हजारों शिक्षक आज पेंशन की दरकार में बेसहारा हो रहे हैं।"
FACT BOX:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शिक्षिका 1 | श्रीमती बृजेश्वरी पोद्दार |
| नियुक्ति | 1998 |
| सेवानिवृत्ति | 2023 |
| संविलियन बाद सेवा | 5 साल |
| स्थिति | पेंशन से वंचित |
| शिक्षिका 2 | श्रीमती रजनी गुप्ता |
| नियुक्ति | 2008 |
| सेवानिवृत्ति | 31 मार्च 2026 |
| संविलियन बाद सेवा | 8 साल |
| स्थिति | पेंशन से वंचित (2 वर्ष कम) |
| स्कूल | पूर्व माध्यमिक शाला कुरंदी, जगदलपुर |