बस्तर में हैंडपंपों की 'नायिका'! गर्मी से राहत दिलाने उतरीं महिला तकनीशियन, 1273 पंप हुए रिपेयर
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| राज्य शासन द्वारा नियुक्त महिला हैंडपंप तकनीशियन बस्तर के दुर्गम इलाकों में हैंडपंप ठीक कर गर्मी में राहत पहुंचा रही हैं। |
जगदलपुर। ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट से जूझ रहे बस्तर संभाग के लिए राहत भरी खबर है। राज्य शासन एवं बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह के निर्देशानुसार हैंडपंप संधारण अभियान तेजी से चल रहा है। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत हैं महिला तकनीशियन जो बस्तर की बेटियों के लिए 'नायिका' बनकर उभरी हैं।
दुर्गम क्षेत्रों में महिलाओं ने मोर्चा संभाला
विगत 15 मार्च से 15 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत अंदरूनी दुर्गम एवं पहाड़ी बसाहटों को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा नियुक्त महिला हैंडपंप तकनीशियन गांव-गांव पहुंचकर न सिर्फ हैंडपंपों की मरम्मत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीणों को जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।
ग्रामीणों ने कहा – "पहले हैंडपंप खराब होने पर काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब महिला तकनीशियन खुद आकर मरम्मत कर देती हैं। यह सराहनीय कदम है।"
मोबाइल वाहनों से त्वरित मरम्मत
मुख्य अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी बस्तर परिक्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले में 2 से 3 मोबाइल संधारण वाहन तैनात किए गए हैं। इन वाहनों में जीआई पाइप, रॉड एवं अन्य स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध हैं, जिससे शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचकर तुरंत मरम्मत की जा रही है।
अब तक 1273 हैंडपंप हुए चालू
अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 1273 हैंडपंपों का सुधार किया जा चुका है:
बस्तर मंडल – 856 हैंडपंप
कोंडागांव मंडल – 417 हैंडपंप
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
यह अभियान न केवल पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता और महिला सशक्तिकरण का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
वर्तमान में यह अभियान निरंतर जारी है और 15 अप्रैल तक सभी खराब हैंडपंपों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
