🌾 मिट्टी की सेहत का नया मंत्र: रासायनिक खेती से मुक्ति दिलाएंगे लाभकारी सूक्ष्मजीव
📍 KVK बस्तर में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कृषक गोष्ठी का आयोजन, 200 से अधिक किसान हुए शामिल
जगदलपुर। 🧫🌱 आज के दौर में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है, वहीं किसानों की लागत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बस्तर में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
🏛️ कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य
📅 तिथि: 24 मार्च 2026
📍 स्थान: कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बस्तर, जगदलपुर
👨🌾 उद्देश्य: किसानों को लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जैविक खेती के प्रति जागरूक करना
इस प्रशिक्षण में बस्तर जिले के विभिन्न गांवों से आए 200 से अधिक पुरुष एवं महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
🎤 विशेषज्ञों ने समझाई सूक्ष्मजीवों की उपयोगिता
👨🏫 डॉ. आर.एस. नेताम (मुख्य अतिथि, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय जगदलपुर)
“बस्तर का परिप्रेक्ष्य जैविक खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। लाभकारी सूक्ष्मजीव न केवल फसल उत्पादन बढ़ाते हैं बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता भी सुनिश्चित करते हैं।”
👨🔬 डॉ. संतोष नाग (प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर)
“वर्तमान समय में फसलों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में लाभकारी सूक्ष्मजीव बहुत ही उपयोगी साबित हो रहे हैं। सूक्ष्मजीवों की सहायता से मृदा की गुणवत्ता में सुधार के साथ उत्पादन लागत में भी कमी लाई जा सकती है।”
🔬 तकनीकी सत्र में मिला मार्गदर्शन
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञों ने किसानों को सूक्ष्मजीवों के व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी:
| वैज्ञानिक | विषय |
|---|---|
| 🧪 डॉ. प्रमोद साहू (वरिष्ठ वैज्ञानिक, ICAR-NBAIR, मऊ) | सूक्ष्मजीवों का मृदा पर प्रभाव, पौध संरक्षण में भूमिका |
| 🌿 डॉ. तेजपाल चंद्राकार (प्रधान वैज्ञानिक) | मृदा सुधार में सूक्ष्मजीवों का योगदान |
| 🍄 डॉ. प्रह्लाद नेताम (वैज्ञानिक) | मशरूम उत्पादन, ट्राइकोडर्मा का महत्व |
| 🥫 डॉ. राहुल साहु (वैज्ञानिक) | खाद्य पदार्थों में लाभदायक है सूक्ष्मजीव |
| 🐛 धर्मपाल केरकेटटा (वैज्ञानिक) | कीट प्रबंधन में बैक्टीरिया, फंगस एवं वायरस की भूमिका |
🎁 किसानों को किया गया सामग्री वितरण
कार्यक्रम के दौरान किसानों को व्यावहारिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सामग्री वितरण भी किया गया:
| सामग्री | मात्रा | लाभार्थी |
|---|---|---|
| 💧 प्लास्टिक लपेटा पाइप (सिंचाई हेतु) | 150 | हितग्राही किसान |
| 🪱 प्लास्टिक वर्मी बेड | 50 | महिला किसान |
वर्मी बेड से महिला किसान घर पर ही वर्मी कंपोस्ट तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा दे सकेंगी।
🏘️ कहां-कहां से आए किसान?
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बस्तर जिले के विभिन्न गांवों से किसानों ने भाग लिया:
छापर भानपुरी, बड़ेचकवा, टाकरागुड़ा, टीकरालोहंगा, नदीसागर, टलनार, नगरनार, बेलगांव, पाइकपाल, कटेनार
👥 उपस्थित अन्य गणमान्य
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर से वैज्ञानिक डॉ. कोमल गुप्ता, डॉ. सुन्ना दीप्ति, डॉ. वेंकटेश्वर जल्लारफ, डॉ. नीलम बंजारे, इंजी. कमल ध्रुव, दिनेश ध्रुव, श्रीमति उर्मिला गोयल उपस्थित रहे।
ग्राम पंचायत स्तर से उपस्थित लोग:
🏡 श्रीमति सुभद्रा बघेल – सरपंच, ग्राम नदीसागर
🏡 सुनील कश्यप – सरपंच, ग्राम रतेंगा-1
🏡 राजू पोयम – उप सरपंच, ग्राम परपा
🏡 बोदा राम कश्यप – उप सरपंच
📹 प्रशिक्षण की पूरी रिपोर्ट देखने के लिए देखें यह वीडियो
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत वीडियो रिपोर्ट में विशेषज्ञों के व्याख्यान, किसानों की प्रतिक्रिया और सामग्री वितरण के दृश्य संकलित किए गए हैं:
🎥 कृषि में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की महत्ता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम की वीडियो रिपोर्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें
📌 संक्षेप में कार्यक्रम की मुख्य बातें
| क्रम | विवरण |
|---|---|
| 1 | 🧫 लाभकारी सूक्ष्मजीवों से मिट्टी की उर्वरता में सुधार |
| 2 | 💰 रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम, लागत में कमी |
| 3 | 🌿 जैविक खेती को बढ़ावा |
| 4 | 🎁 150 किसानों को सिंचाई पाइप, 50 को वर्मी बेड वितरित |
| 5 | 📹 वीडियो रिपोर्ट उपलब्ध |

