बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026: 9,800 से अधिक धावकों के साथ रचा इतिहास, वैश्विक मंच पर चमका बस्तर
जगदलपुर। बस्तर की ऐतिहासिक और नैसर्गिक धरा उस समय गौरवशाली क्षण की साक्षी बनी, जब ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ में उत्साह का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा और 9,800 से अधिक पंजीकृत धावकों ने भाग लेकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर के बदलते स्वरूप, बढ़ती शांति और शासन की ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियों की सफलता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।
चित्रकोट जल प्रपात के समीप आयोजित समापन समारोह के अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने मैराथन के विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि समृद्ध और विकसित बस्तर बनाने के प्रयास के साथ बस्तर क्षेत्र में यह आयोजन एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, “बस्तर बदल रहा है, बस्तर जो चार दशक से अशांत क्षेत्र रहा, अब शांति का गढ़ बन रहा है। यहाँ के युवा खेल गतिविधियों के साथ ही देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफल हो रहे हैं।” शांति के इस माहौल में बस्तर मैराथन में देश-विदेश के कई राज्यों और प्रदेश के अन्य जिलों तथा बस्तर संभाग के खिलाड़ी शामिल हुए। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते हुए भविष्य में पुनः भव्य आयोजन की आशा व्यक्त की।
विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ हाफ मैराथन आयोजन के बाद बस्तर हेरिटेज मैराथन का आयोजन शांति, विकास और समृद्धि का नया अध्याय है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति दी जाएगी, इसी का एक प्रयास यह मैराथन का आयोजन है। इस अवसर पर सांसद बस्तर महेश कश्यप और चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजेताओं को बधाई दी।
मैराथन का मुख्य आकर्षण 42 किलोमीटर की फुल मैराथन रही, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से हुई और समापन ‘भारत का नियाग्रा’ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के तट पर हुआ। आयोजन को समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसे 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी और 5 किमी की श्रेणियों में विभाजित किया गया था। 21 किमी दौड़ पोटानार तक, 10 किमी दौड़ कुम्हरावंड तक, जबकि 5 किमी की दौड़ लालबाग से दलपत सागर रानीघाट तक आयोजित की गई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन द्वारा 25 लाख रुपये की आकर्षक इनामी राशि घोषित की गई थी। साथ ही स्थानीय धावकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा का अवसर देने हेतु ‘बस्तर कैटेगरी’ का विशेष प्रावधान रखा गया और बस्तर जिले के निवासियों के लिए पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया।
विशेष बात यह रही कि इस मैराथन में मांझी-चालकी समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन की सामाजिक समावेशिता और अधिक सुदृढ़ हुई। इस भव्य आयोजन ने न केवल खेल भावना को प्रोत्साहित किया, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, शांति और विकास की नई तस्वीर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, जगदलपुर महापौर संजय पांडेय, ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि, मांझी-चालकी, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026: इथियोपियाई धावकों का दबदबा, स्थानीय खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
फुल मैराथन में अफ्रीकी धावकों का दबदबा
बस्तर हेरिटेज मैराथन के सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण पड़ाव यानी फुल मैराथन (42.195 किमी) के ओपन पुरुष वर्ग में इथियोपियाई मूल के धावकों का दबदबा देखने को मिला। टेडेजे किनेटो वाशे ने मात्र 02:26:49 के अविश्वसनीय समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी श्रेणी में महिलाओं के ओपन वर्ग में मेसेरेट मेंगिस्तु ने 02:41:50 का समय लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
बस्तर के धावकों ने गौरव बढ़ाया
गौरवान्वित करने वाली बात यह रही कि बस्तर के स्थानीय धावकों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौती को बखूबी स्वीकार किया। 'फुल मैराथन बस्तर पुरुष' वर्ग में संजय कोर्राम ने 02:31:50 में दौड़ पूरी कर जीत का परचम लहराया, वहीं स्थानीय महिला वर्ग में कुसुम शार्दुल ने 03:18:43 के समय के साथ शीर्ष स्थान हासिल कर बस्तर का मान बढ़ाया।
हाफ मैराथन और अन्य श्रेणियों में रोमांच
प्रतिस्पर्धा का रोमांच हाफ मैराथन (21 किमी) में भी चरम पर रहा। पुरुष ओपन वर्ग में मोनू कुमार ने 01:05:31 की तूफानी रफ्तार से पहला स्थान हासिल किया, जबकि महिला ओपन वर्ग में त्सेहे देसाले 01:17:40 के साथ विजेता बनीं। बस्तर के ही बेटे भावेष कुमार और बेटी कुमली पोयाम ने हाफ मैराथन के स्थानीय कोटे में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में बाजी मारी।
वहीं, 10 किलोमीटर की श्रेणी में बबलू (00:28:43) और पूनम (00:34:56) ने अपनी श्रेणी में सबसे तेज दौड़ लगाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इस मैराथन की सबसे सुखद तस्वीर भविष्य के सितारों ने पेश की। 18 वर्ष से कम आयु के जूनियर वर्ग में सागर और लावण्या ने जीत हासिल की, जबकि सब-जूनियर श्रेणी में मोहित धोंडू और अंजलि गुप्ता जैसे नन्हे धावकों ने दिखा दिया कि आने वाले समय में बस्तर से ओलंपिक जैसे मंचों के लिए धावक तैयार हो रहे हैं। यह मैराथन केवल एक दौड़ नहीं थी, बल्कि बस्तर की विरासत, साहस और विकास की नई उड़ान का जीवंत प्रमाण बनकर उभरी है।
📦 बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026: व्यवस्थाएं एक नजर में
मैराथन के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं कीं। मार्ग पर जगह-जगह धावकों के लिए पेयजल, फल एवं एनर्जी ड्रिंक की सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और एंबुलेंस की तैनाती भी की गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। वहीं, विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नर्तक दलों द्वारा दी गई पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने धावकों और दर्शकों का उत्साह दोगुना कर दिया। इस आयोजन ने न केवल खेल भावना को बढ़ावा दिया, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया।



