बस्तर में अब हिंसा नहीं, उम्मीदों की दौड़: मैराथन में 200+ पूर्व माओवादी होंगे शामिल

बस्तर की वादियों में अब हिंसा नहीं, उम्मीदों की दौड़: मैराथन में पुनर्वासित युवाओं का जोश

बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 की तैयारी करते पुनर्वासित युवा धावक सड़क पर दौड़ते हुए
बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 से पहले जगदलपुर के स्थानीय मैदान में अभ्यास करते पुनर्वासित युवा। जिन हाथों में कभी बंदूक थी, वे अब फिनिशिंग लाइन छूने का सपना देख रहे हैं।
जगदलपुर। बस्तर की शांत पहाड़ियों में इस बार सिर्फ प्रकृति की आवाज़ नहीं गूंजेगी, बल्कि यहाँ बदलाव की एक नई दस्तक सुनाई दे रही है। 22 मार्च को होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 सिर्फ एक दौड़ नहीं है—यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर अब उम्मीदों की राह पकड़ ली है।

इस बार मैराथन की सबसे बड़ी तस्वीर वो युवा हैं, जो कभी जंगलों के अंधेरों में खोए हुए थे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अब समाज की मुख्यधारा में वापस लौट चुके हैं और अब वे इस खेल आयोजन में अपनी ताकत और जज्बे का लोहा मनवाने को पूरी तरह तैयार हैं।

बंदूक छोड़ी, अब दौड़ लगाएंगे

बस्तर की फिजा बदल रही है। यहाँ अब बारूद की बू नहीं, बल्कि सपनों की खुशबू है। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वे अब मैराथन ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाएंगे। दंतेवाड़ा के 'लोन वर्राटू' और 'पूना मारगेम' जैसे पुनर्वास कार्यक्रमों ने इन युवाओं को नई जिंदगी दी है। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा रहे हैं।

स्थानीय मैदानों में चल रहे अभ्यास सत्रों में पसीने से तर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बता रही हैं कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। प्रशिक्षकों के मुताबिक, इन युवाओं में असाधारण सहनशक्ति है, और अब उन्हें आधुनिक तकनीक से दौड़ की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं।

एक महिला प्रतिभागी बताती हैं, "पहले डर के साये में जिंदगी थी। आज समाज में सम्मान मिल रहा है, सुरक्षा मिल रही है। यह दौड़ हमारे लिए सिर्फ खेल नहीं, नई शुरुआत है।"

42 किलोमीटर की दौड़, 25 लाख का इनाम

यह मैराथन ऐतिहासिक लालबाग मैदान से शुरू होकर चित्रकोट जलप्रपात के किनारे खत्म होगी। पूरी 42 किलोमीटर की यह फुल मैराथन, 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की फन रन जैसी श्रेणियों में बंटी है। हर स्तर के धावकों के लिए यहाँ जगह है।

खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की इनामी राशि रखी है। खासतौर पर बस्तर कैटेगरी में अलग प्रावधान किए गए हैं, ताकि स्थानीय युवाओं और इन पुनर्वासित धावकों को बराबरी का मौका मिल सके। बस्तर जिले के सभी धावकों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है—ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक वजह से पीछे न रह जाए।

सात जिलों से आएंगे 200 से ज्यादा पुनर्वासित धावक

इस आयोजन में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों—सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव—से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर हिस्सा ले रहे हैं। उनके साथ स्थानीय एथलीट, छात्र, युवा और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी दौड़ेंगे।

यह मैराथन अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं रह गई है। यह बस्तर में शांति, एकता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। 'पूना मारगेम' की अवधारणा—पुनर्वास से पुनर्जीवन—इन युवाओं की इस भागीदारी के साथ साकार होती दिख रही है।

कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

अगर आप भी इस ऐतिहासिक दौड़ का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या जारी विज्ञापनों में दिए गए क्यूआर कोड के जरिए पंजीकरण कर सकते हैं। किसी भी तरह की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 92440-79533 भी जारी किया गया है।

22 मार्च को जब ये धावक चित्रकोट की लहरों के संग कदमताल करेंगे, तो वे सिर्फ फिनिश लाइन की ओर नहीं दौड़ रहे होंगे—वे बस्तर के एक नए, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भविष्य की ओर दौड़ रहे होंगे।

basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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