राष्ट्रीय महिला किसान दिवस: कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में महिला कृषकों की कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में महिला किसानों के अमूल्य योगदान को दी गई मान्यता, विभिन्न ब्लॉकों से 65 महिलाओं ने लिया भाग
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| कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर आयोजित कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न ब्लॉकों से उपस्थित महिला कृषक। — फोटो: कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर |
इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में महिला कृषकों की कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से करीब 65 महिलाएं शामिल हुईं। बस्तर जिले में कृषि क्षेत्र में महिलाएं एक अहम भूमिका निभा रही हैं तथा कृषि कार्य में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रही हैं। कार्यक्रम में उनके कार्यों की सराहना करते हुए उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
मुख्य अतिथि ने किया महिला कृषकों को प्रोत्साहित
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम डेंग छापरभानपुरी की सरपंच श्रीमती दशमी कश्यप उपस्थित रहीं। उन्होंने महिला कृषकों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि वे स्वयं भी कृषि में अपना योगदान देती हैं। ग्रामीण जनप्रतिनिधि के रूप में वे महिला कृषकों को निरंतर सहयोग देती आ रही हैं। उन्होंने महिलाओं को आगे बढ़कर आने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे सुधार लाकर आगे बढ़ सकें और अपनी अलग पहचान बना सकें।
उन्नत तकनीक अपनाने एवं वैज्ञानिकों से संपर्क करने की सलाह
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती धनई मौर्य, सरपंच ग्राम छापरभानपुरी, विकासखंड तोकापाल उपस्थित रहीं। उन्होंने महिला कृषकों को उन्नत तकनीक को अधिक से अधिक अपनाने तथा वैज्ञानिकों से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन से महिला कृषक अपनी उत्पादकता एवं आय दोनों बढ़ा सकती हैं।
महिला वैज्ञानिकों ने दी विभिन्न विषयों की जानकारी
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की महिला वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. कोमल गुप्ता ने फसल विज्ञान पर जानकारी प्रदान की। डॉ. सुन्ना दीप्ति ने उद्यानिकी फसलों — फल, फूल एवं सब्जी को उन्नत पद्धति एवं विधि से लेने के लिए महिला कृषकों को प्रोत्साहित किया।पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. नीलम बंजारे ने बताया कि महिला कृषक ग्रामीण स्तर पर हर घर में पशुपालन, मुर्गी पालन एवं बकरी पालन में मुख्य भूमिका निभाती हैं। यदि वे उन्नत नस्ल की बकरी या मुर्गी पालन का ध्यान देकर उन्नत तकनीक का उपयोग करें, तो वे और भी अधिक आय प्राप्त कर सकती हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केंद्र प्रमुख डॉ. संतोष नाग के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राहुल साहू थे। उन्होंने कृषि में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला। मंच संचालन कीट वैज्ञानिक डॉ. धर्मपाल केरकेट्टा ने किया। कार्यक्रम के अंत में महिला कृषकों द्वारा साथी परियोजना अंतर्गत मिलेट केफे से संबंधित उत्पादों — जैसे मिर्ची भजिया, डोसा एवं इडली की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश्वर जल्लारफ, दुष्यंत पांडे, इंजीनियर कमल ध्रुव, दिनेश कुमार ध्रुव, कृषि विभाग से सहायक संचालक अखिलेश नाग, विक्रम भदौरिया, बस्तर सेवक मंडल के कर्मचारी तथा जगदलपुर, तोकापाल, बास्तानार एवं दरभा के अंतर्गत कर्मचारी एवं महिला कृषक उपस्थित रहे।

