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कीटनाशक पर खर्च होगा कम, फसल बचेगी! बस्तर के 65 कृषि कर्मियों को मिली IPM की मास्टर क्लास

कीटनाशक पर खर्च होगा कम, फसल बचेगी! बस्तर के 65 कृषि कर्मियों को मिली IPM की मास्टर क्लास

कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण, केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव केंद्र रायपुर के साथ संयुक्त आयोजन; किसानों को फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और जैविक कीटनाशकों के उपयोग की दी जानकारी

"कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित किसान, कृषि अधिकारी एवं वैज्ञानिक"
जगदलपुर: कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित किसान। — फोटो: कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर
जगदलपुर, बस्तर | 29 अक्टूबर 2026: फसलों में कीट लगें तो किसान सबसे पहले रसायनिक कीटनाशकों का सहारा लेते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और पर्यावरण को भी नुकसान होता है। लेकिन अब बस्तर के किसानों को इसका स्मार्ट तरीका सिखाया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बस्तर और केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव केंद्र, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (IPM) पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 65 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।

किसानों को सिखाए कीट प्रबंधन के वैज्ञानिक गुर

"कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित किसान, कृषि अधिकारी एवं वैज्ञानिक"
जगदलपुर: कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि अधिकारी एवं वैज्ञानिक। — फोटो: कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर
कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संतोष नाग के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राहुल साहू ने कहा कि प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के ऐसे प्रशिक्षणार्थियों को शामिल किया गया है, जो सीधे कृषक प्रक्षेत्र और किसानों के साथ कार्य करते हैं। इसका उद्देश्य कीट एवं रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों का व्यापक प्रसार करना तथा अधिक से अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचाना है।

ट्रैप से कीटों की निगरानी और प्रबंधन

कीट वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा ने बताया कि समन्वित कृषि प्रणाली से कीटों का प्रभावी नियंत्रण होता है और रसायन का कम उपयोग होने से लागत भी घटती है, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण होता है। कार्यक्रम में केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के डॉ. आशीष जायसवाल, डॉ. वरुणेश कुमार और के. एल. मीणा ने फसलों में कीटों की पहचान, उनके जीवन-चक्र, प्रकोप की परिस्थितियों और समेकित प्रबंधन के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पीला स्टिकी ट्रैप मुख्य रूप से माहू, सफेद मक्खी और लीफ माइनर जैसे रस चूसक कीटों की निगरानी में उपयोगी है, जबकि नीला स्टिकी ट्रैप थ्रिप्स जैसे छोटे उड़ने वाले कीटों के लिए। इसी तरह सफेद स्टिकी ट्रैप सहित अन्य रंगीन ट्रैपों से विभिन्न कीटों की संख्या के आधार पर समय पर प्रबंधन करने की तकनीक समझाई गई। फेरोमोन ट्रैप से नर कीटों की निगरानी और सामूहिक फंसाव तथा लाइट ट्रैप से रात्रिचर कीटों के प्रबंधन की जानकारी दी गई।

जैविक कीटनाशकों का उपयोग भी सीखा

प्रशिक्षण में जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन के तहत लाभदायक सूक्ष्मजीवों के उपयोग की जानकारी दी गई। कीट प्रबंधन में बेसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bt), ब्यूवेरिया बैसियाना, मेटाराइजियम एनीसोप्लिए और लेकैनिसिलियम/वर्टिसिलियम आधारित जैव-एजेंटों की कार्यप्रणाली बताई गई। वहीं फसल रोगों के जैविक प्रबंधन में ट्राइकोडर्मा की भूमिका समझाई गई। जैविक एजेंटों का सही मात्रा और सही समय पर उपयोग करने तथा रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने पर जोर दिया गया।

फसल चक्रण से लेकर बीज उपचार तक

प्रशिक्षण के दौरान एकीकृत कीट प्रबंधन की विभिन्न विधियों—कर्षण पद्धति, फसल चक्रण, जैविक नियंत्रण, यांत्रिक नियंत्रण, भौतिक नियंत्रण और आवश्यकता आधारित रासायनिक नियंत्रण—के बारे में विस्तार से समझाया गया। खेत की नियमित निगरानी, संक्रमित पौधों को हटाना, खरपतवार नियंत्रण, उचित फसल दूरी, समय पर बुवाई और संतुलित पोषण को भी कीट प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। बीज उपचार का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

रोगों की पहचान और प्रबंधन पर जोर

कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर की कार्यक्रम सहायक श्रीमती श्वेता मंडल श्रीवास्तव ने विभिन्न फसलों में होने वाले प्रमुख रोगों, उनके लक्षणों की पहचान और रोगों के प्रभावी प्रबंधन के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रोग के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर समय पर प्रबंधन उपाय अपनाने तथा रोगग्रस्त पौधों और खेत की नियमित निगरानी के महत्व को रेखांकित किया।

65 प्रशिक्षणार्थियों ने लिया भाग

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर के वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश्वर जल्लारफ, डॉ. नीलम बंजारे, डॉ. सुन्ना दीप्ति, डॉ. कोमल गुप्ता और इंजी. कमल ध्रुव, दिनेश ध्रुव सहित कृषि विभाग, जगदलपुर से 10 कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग से 10 उद्यानिकी अधिकारी, बस्तर सेवक मंडल और सेबा से 20 फील्ड कार्यकर्ता तथा किसान एवं अन्य कृषक-फील्ड से जुड़े प्रतिभागियों सहित कुल 65 प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की।

रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने पर जोर

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि फसलों में कीट और रोगों का प्रबंधन केवल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर न रहकर निवारक, जैविक, यांत्रिक, भौतिक और आवश्यकता आधारित रासायनिक उपायों के समन्वित प्रयोग से किया जाना चाहिए। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित करने, कीटनाशकों के अनावश्यक उपयोग को कम करने, पर्यावरण और लाभदायक जीवों की सुरक्षा करने तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।

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basant dahiya

मेरा नाम बसंत दहिया है। मैं लगभग 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं। इसी बीच मैंने बस्तर जिला व राजधानी रायपुर के प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवा देकर लोकहित एवं देशहित में कार्य किया है। वर्तमान की आवश्यकता के दृष्टिगत मैंने अपना स्वयं का न्यूज पोर्टल- समग्रविश्व अप्रेल 2024 से शुरू किया है जो जनहित एवं समाज कल्याण में सक्रिय है। इसमें आप सहयोगी बनें और मेरे न्यूज पोर्टल को सपोर्ट करें। "जय हिन्द, जय भारत"

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